उत्तराखंड की प्रसिद्ध ‘रामसर साइट’ और पर्यावरण की अमूल्य धरोहर कही जाने वाली आसन नदी क्षेत्र में प्रशासनिक संरक्षण के साये में चल रहे अवैध खनन के खिलाफ अब जनता का सब्र पूरी तरह टूट चुका है। प्रधान प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों के लगातार विरोध के बावजूद जब खनन माफियाओं पर लगाम नहीं लगी, तो आज दर्जनों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए।

आसन नदी श्मशान घाट मार्ग पर भारी रोष के साथ ग्रामीणों ने उग्र प्रदर्शन किया और दो टूक चेतावनी दी कि “अगर प्रशासन ने आंखें नहीं खोलीं, तो जनता को खुद लाठी उठानी पड़ेगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शाहपुर कल्याणपुर (विपिन सिंह) के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा, “प्रशासन होश में आओ, हमारी धरोहर रामसर साइट को बचाओ!”ग्रामीणों का आरोप है कि मानसून और इस संवेदनशील दौर में नदी के अंदर खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद, बेखौफ माफिया ‘टमटम’ (ट्रैक्टरों पर फिट जेसीबीनुमा अवैध मशीनों) के जरिए नदी को अंदर तक खोखला कर रहे हैं। इस अवैध ‘चीरफाड़’ के खेल के कारण श्मशान घाट तक जाने वाला मुख्य रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है,

वहीं नदी के कटाव से किसानों की उपजाऊ जमीनें लगातार पानी में विलीन हो रही हैं।जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आक्रोशित ग्रामीणों ने पिछले साल विकासनगर तहसील क्षेत्र में हुई उस दर्दनाक दुर्घटना का हवाला दिया, जब अवैध खनन में लिप्त एक ट्रैक्टर उफनती बाढ़ की चपेट में आकर नदी में फंस गया था और कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई और अवैध खनन पर तुरंत रोक लगाकर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामवासी उग्र आंदोलन के तहत सीधे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।

