देहरादून के मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण यानी MDDA में भवन मानचित्रों की स्वीकृति और कथित अवैध निर्माण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला अब शासन तक पहुंच चुका है, सचिव आवास के आदेश के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है ,जहां से पूरे प्रकरण की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल, 30 जून 2026 को शिकायतकर्ता ने MDDA क्षेत्र में नियमों के विरुद्ध कराए जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर शासन में शिकायत की थी।शिकायत का संज्ञान लेते हुए 9 जुलाई 2026 को आवास अनुभाग-2 के उप सचिव रजनीश जैन ने MDDA उपाध्यक्ष को पत्र भेजकर मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए। शासन ने स्वीकृत मानचित्रों, उपलब्ध अभिलेखों, आदेशों, तकनीकी परीक्षण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका समेत सभी तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने को कहा है।लेकिन मुख्यमंत्री के विभाग में सचिव के आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रहे हैं MDDA की एक नोटशीट स्क्रीन पर दिखाई जा रही है जिसमें मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका से जुड़ी जानकारी दर्ज है। नोटशीट के मुताबिक 27 अगस्त 2025 को Assistant Engineer की रिपोर्ट के बाद फाइल आगे बढ़ाई गई। इसी दिन “Approve as per AE report” टिप्पणी दर्ज की गई, जिसमें Executive Engineer सुनील कुमार का नाम भी दर्ज है।


इसके बाद 11 सितंबर 2025 को Approval Fee Payment की प्रक्रिया सामने आती है।इस घोटाले का महत्वपूर्ण दस्तावेज 7अगस्त 2025 का MDDA कार्यालय आदेश है, जिसमें सिंगल ड्वेलिंग आवासीय भवनों में स्टिल्ट पार्किंग को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए थे। आदेश के अनुसार दो से अधिक तलों वाले सिंगल ड्वेलिंग भवन में स्टिल्ट पार्किंग अनुमन्य नहीं होगी।लेकिन इसके बावजूद सभी नियमों को ताक पर धरकर सुनील कुमार ने उच्च अधिकारियों से अवैध नक्शा स्वीकृत करा दिया।सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस अवैध नक्शे को वैध करने के एवज में करोडों रूपए का लेन-देन हुआ है। ऐसे में सवाल है कि संबंधित मानचित्र की स्वीकृति किन आधारों पर आगे बढ़ी और इसमें अधिकारियों की भूमिका क्या रही। इस मामले में सुनील कुमार का पक्ष सामने नहीं आया है। अब शासन स्तर पर होने वाली जांच से ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट होगी।सचिव आवास डा आर राजेश कुमार का साफ कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में कठोर कार्रवाई की जायेगी और इसी तरह के अवैध निर्माण और उनमें संलिप्त इंजीनियर, आर्किटेक्ट, बिल्डर और अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा

