टिहरी विकास प्राधिकरण में नक्शा स्वीकृति को लेकर विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मानचित्र पत्रावली संख्या TSN/CC/0011/26-27, अमित गुप्ता के मामले में सहायक अभियंता ने अपने लिखित स्पष्टीकरण में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पर प्रस्तावित नक्शे को स्वीकृत करने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया है। सहायक अभियंता ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए 15 सितंबर 2026 की UHUDA कार्यालय की CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की मांग भी की है।सहायक अभियंता के लिखित जवाब के मुताबिक, उन्हें 15 सितंबर को UHUDA कार्यालय में मानचित्र की स्वीकृति को लेकर वार्ता के लिए बुलाया गया था। बैठक में प्रस्तावित नक्शे के वास्तुविद भी मौजूद थे।

सहायक अभियंता का दावा है कि नक्शे में भवन खसरा संख्या 605 में दर्शाया गया था, जबकि उपलब्ध सजरा प्लान और गूगल मैप की इमेज के मिलान में भवन खसरा संख्या 513 में दिखाई देता है।जवाब में आगे कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के Civil Appeal No. 4452 of 2019 में पारित आदेश के अनुसार खसरा संख्या 513 को private forest बताया गया है और उस पर वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधान लागू होते हैं।

सहायक अभियंता के मुताबिक, यह तथ्य सामने रखने के बाद उपाध्यक्ष ने नाराजगी जताई और नक्शे को किसी भी दशा में स्वीकृत करने के निर्देश दिए।इसके बाद 16 सितंबर को सहायक अभियंता से स्पष्टीकरण मांगा गया, जिसे उन्होंने इस घटनाक्रम की प्रतिक्रिया बताया है।

अब पूरे मामले में 15 सितंबर की CCTV रिकॉर्डिंग और संबंधित पत्रावली की जांच अहम मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार अमित गुप्ता टेंट के बड़े कारोबारी हैं और उनका निर्माण अवैध है जिसे ‘डील” होने की वजह से सील नहीं किया गया है।

विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि एक करोड़ रुपए एडवांस लिए जा चुके थे और बाकी के अस्सी लाख रुपए मानचित्र स्वीकृत होने पर देने तय हुए थे।
अब देखना यह है कि अमित गुप्ता की बिल्डिंग सील होगी या नहीं और एक करोड़ रुपए वापस होंगे?


