उत्तराखंड जल संस्थान में विश्व बैंक पोषित परियोजना संबंधित टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आरोप हैं कि एक अपात्र कंपनी को टेंडर देने की तैयारी में अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जबकि पात्र कंपनी को भ्रष्टाचार के चलते तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

एआरपी मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड ने इस फैसले के खिलाफ अभ्यावेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

कंपनी का आरोप है कि टेंडर की शर्तों और दस्तावेजों के मूल्यांकन में समान मानकों का पालन नहीं किया गया।

इस पूरे मामले में जल संस्थान के अधिकारी डॉ. रणबीर सिंह चौहान का नाम भी चर्चा में है। उनकी छवि एक ईमानदार अधिकारी की है, लेकिन अब उन पर आरोप उठ रहे हैं।

अधिनस्थ उन्हें भी अंधेरे में रखकर टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं। अधिकारी दबी जुबान से “सर्वोच्च दबाव” की बात कर अपना पीछा छुड़ाते दीख रहे हैं।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कंपनी की ओर से भेजे गए अभ्यावेदन की प्रति सभी अधिकारियों और वर्ल्ड बैंक के संबंधित ईमेल पतों पर भी भेजी गई है।अब सवाल यह है कि टेंडर प्रक्रिया में सब कुछ नियमों के मुताबिक हुआ है या फिर कहीं कोई अनियमितता हुई है?

यदि आरोपों की जांच में भ्रष्टाचार या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो यह मामला प्रदेश की सीमाओं से बाहर राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोर सकता है।अब निगाहें उत्तराखंड जल संस्थान के जवाब और मामले की निष्पक्ष जांच पर टिकी हैं।

