सर्दियों का मौसम शुरू होते ही आसन बैराज की झील में विदेशी मेहमानों की चहचहाहट गूंजने लगी है। हजारों मील का सफर तय कर अलग-अलग देशों से पहुंचे प्रवासी पक्षी इन दिनों यहां की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं। देहरादून से करीब 38 किलोमीटर दूर स्थित आसन वेटलैंड अपनी जैव विविधता के लिए खास पहचान रखता है। वर्ष 2020 में इसे उत्तराखंड का पहला रामसर स्थल घोषित किया गया था। झील में अठखेलियां करते इन परिंदों को देखने के लिए पर्यटकों में भी खासा उत्साह रहता है। देखिए, आसन झील से इंद्रपाल सिंह की यह रिपोर्ट।आसन बैराज की झील में सर्दियों के साथ ही प्रवासी पक्षियों की आमद शुरू हो गई है। साइबेरिया समेत ठंडे क्षेत्रों से आने वाले ये परिंदे लंबी दूरी तय कर यहां पहुंचते हैं। अनुकूल वातावरण, भोजन की उपलब्धता और शांत जलक्षेत्र इन पक्षियों को हर साल अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यही वजह है कि सर्दियों के मौसम में आसन झील प्रवासी पक्षियों की गतिविधियों से गुलजार नजर आती है।वर्ष 2005 में कंजर्वेशन रिजर्व के रूप में पहचान बनाने वाला आसन वेटलैंड करीब 444.4 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है।

यहां हर साल अक्टूबर से मार्च तक विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी देखने को मिलती है। झील में पानी पर तैरते और आसमान में झुंड बनाकर उड़ते इन पक्षियों का नजारा पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों को आकर्षित करता है।आसन वेटलैंड को वर्ष 2020 में रामसर स्थल का दर्जा मिलने के बाद इसकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत हुई है। प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना जरूरी है। वन विभाग की ओर से पक्षियों की सुरक्षा और निगरानी पर ध्यान दिया जाता है, ताकि सर्दियों में यहां आने वाले इन मेहमान परिंदों का प्रवास सुरक्षित बना रहे।

