उत्तरकाशी जनपद के दूरस्थ मोरी विकासखंड के ओसला, गंगाड़, पवाणी और ढाटमीर गांवों में लगातार बारिश के चलते गियागाड़ का जलस्तर बढ़ गया है। पैदल पुल न होने के कारण ग्रामीण उफनते गदेरे को एक टूटे हुए पेड़ के सहारे जान जोखिम में डालकर पार करने को मजबूर हैं। स्कूली बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी रोज इसी रास्ते से आवाजाही कर रहे हैं, जहां एक छोटी सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।गुरुवार को नदी पार करते समय एक बुजुर्ग का संतुलन बिगड़ गया और वह तेज बहाव में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें किसी तरह बाहर निकालकर उपचार के लिए भेजा।ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सुरक्षित पुल और वैकल्पिक आवागमन की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। उनका आरोप है कि विकास केवल कागजों तक सीमित है, जबकि जमीनी हकीकत में लोग आज भी पेड़ के सहारे जीवन और मौत के बीच सफर करने को मजबूर हैं।
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Saturday, August 1

