उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को धाकड़ और धुरंधर के नामों से इसलिए संबंधित किया जाता है
क्योंकि वह किसी भी तरह के अन्याय, भ्रष्टाचार, अनैतिक कामों के खिलाफ हैं और समय समय पर कठोर कार्रवाई और निर्णय लेने से पीछे नहीं हटते।
उर्जा विभाग में पी सी ध्यानी, अनिल यादव का प्रकरण तो जग जाहिर है ऐसे ही सिंचाई विभाग से अवैध प्रतिनियुक्ति पर चल रहे इंजीनियरों जिनके नाम है

देवेन्द्र सिंह रावत, शैलेन्द्र सिंह रावत, सुरजीत सिंह रावत और विजय सिंह रावत ।



सिंचाई विभाग ने चारों को दिनांक 10 June को पत्र लिखकर प्रतिनियुक्ति खत्म करते हुए तुरंत वापस बुलाने के लिए लिखा था और एक सप्ताह में समय पर विभाग में वापसी न करने का स्पष्टीकरण भी मांगा था लेकिन इसके बावजूद चारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। कौन और क्यों बचा रहा है इन चारों को? सचिव आवास कयो इन चारों को रिलिव नहीं कर रहे हैं जबकि मूल विभाग के द्वारा प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के उपरांत उन्हें इन चारों को रोकने का कोई भी अधिकार नहीं है।

देवेन्द्र सिंह रावत के उपर तो भ्रष्टाचार के बहुत सारे संगीन आरोप हैं जिनकी जांच के बारे में सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार उपाध्यक्ष हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण को पत्र के माध्यम से जांच करने को लिखा हुआ है।

ऐसे में इन चारों की प्रतिनियुक्ति पर बने रहना मुख्यमंत्री को विवादास्पद बनाने कि साज़िश है।
सिंचाई विभाग के विभागाध्यक्ष नै एक हफ्ते के उपरांत आरोप पत्र शासन को प्रेषित करने के लिए कहा था लेकिन इन चारों के सामने सभी नतमस्तक हैं …
आगामी चुनावों में यह भ्रष्टाचार का मुद्दा कहीं भारी न पड़ जाएं ?

