रुड़की के भगवानपुर में स्वास्थ्य विभाग और फर्जी अस्पतालों की मिलीभगत का एक और बड़ा खुलासा! दो दिन पहले हमारे चैनल ने प्रमुखता से खबर दिखाई थी कि कैसे क्षेत्र में अवैध और फर्जी अस्पताल बेखौफ चल रहे हैं। खबर का असर यह हुआ कि नींद में सोया स्वास्थ्य विभाग जागा और भगवानपुर के सीएमएस साहब दल-बल के साथ निरीक्षण करने निकले।
लेकिन साहब की यह कार्रवाई महज खानापूर्ति बनकर रह गई! तीन अस्पतालों का निरीक्षण हुआ, कमियां मिलीं, लेकिन ठोस कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाकर फाइल को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी कर दी गई।

भगवानपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। गली-मोहल्लों में बिना कमर्शियल लाइसेंस और बिना फायर ब्रिगेड की एनओसी के रिहायशी मकानों में धड़ल्ले से अस्पताल चलाए जा रहे हैं। कई जगह तो स्थिति इतनी गंभीर है कि बिना किसी बोर्ड के अवैध क्लीनिक चल रहे हैं। बोर्ड पर MBBS डॉक्टरों की डिग्रियां सजाई गई हैं, लेकिन मौके पर बीएएमएस और झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ करते नजर आ रहे हैं।

जब हमारे चैनल के खुलासे के बाद सीएमएस साहब पर दबाव बना, तो वे तीन अस्पतालों का जायजा लेने पहुंचे। बायोमेडिकल वेस्ट और सफाई की खामियां मिलने के बाद भी कार्रवाई करने के बजाय केवल चेतावनी देकर मामले को टालने की कोशिश की गई। जरा सुनिए सीएमएस साहब का क्या कहना है…

फाइनल– सवाल बड़ा है—क्या महज निरीक्षण का नाटक करके और नोटिस देकर कागजी खानापूर्ति की जाएगी? क्या इन फर्जी अस्पतालों को किसी बड़े हादसे का इंतजार है? जब नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, तो इन अस्पतालों को सील करने के बजाय ठंडे बस्ते में क्यों डाला जा रहा है? [चैनल का नाम] स्वास्थ्य विभाग के इस ढुलमुल रवैये पर सवाल उठाता रहेगा और जब तक इन फर्जी अस्पतालों पर ताला नहीं लटकता, हमारी यह मुहिम जारी रहेगी।


