कानून की धज्जियाँ कैसे उड़ाई जाती हैं और नियमों को ताक पर रखकर ‘सरकारी कोठेंगा’ कैसे दिखाया जाता है… अगर आपको देखना है, तो धर्मनगरी हरिद्वार के श्यामपुर चले आइए।जी हाँ, जहाँ एक तरफ गंगा को प्रदूषण मुक्त और सुरक्षित रखने के लिए करोड़ों-अरबों के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण यानी HRDA की नाक के ठीक नीचे मां गंगा के सीने पर अवैध प्लॉटिंग का एक बहुत बड़ा खेल चल रहा है। ये तस्वीरें हरिद्वार जिले के श्यामपुर इलाके की हैं। ध्यान से देखिए इन नज़ारों को। जहाँ कल तक प्रकृति का वास था, जहाँ से पतित पावनी गंगा अपनी अविरल धारा के साथ बहती हैं, आज वहाँ प्रॉपर्टी डीलरों का कंक्रीट का जाल बिछ रहा है। एक बहुत बड़े क्षेत्रफल में, गंगा नदी के बिल्कुल किनारे ज़मीन को समतल करके अवैध रूप से प्लॉट काट दिए गए हैं।लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस महा-अवैध निर्माण पर हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण मौन क्यों है? क्या एचआरडीए के अधिकारियों को यह नजर नहीं आता, या फिर जानबूझकर इस तरफ से आँखें मूँद ली गई हैं? स्थानीय लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि यह पूरा खेल विभाग को ठेंगा दिखाकर और नियमों को ठेंगा दिखाकर सरेआम खेला जा रहा है।अब सवाल उठता है कि क्या गंगा नदी के किनारे इस तरह की प्लॉटिंग करना कानूनी और पर्यावरणीय रूप से उचित है?नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT के सख्त निर्देश हैं कि गंगा नदी के हाई फ्लड लेवल (HFL) यानी बाढ़ क्षेत्र के दायरे में किसी भी तरह का पक्का निर्माण या कमर्शियल एक्टिविटी पूरी तरह प्रतिबंधित है। नदी के किनारों को छेड़ने का मतलब है सीधे-सीधे तबाही को दावत देना। जब भी मानसून में गंगा का जलस्तर बढ़ेगा, यह अवैध कॉलोनी न सिर्फ खुद डूबेगी, बल्कि नदी के स्वाभाविक बहाव को रोककर आसपास के गांवों के लिए भी भारी खतरा पैदा कर देगी।इसके बावजूद, यहाँ धड़ल्ले से ज़मीनें बेची जा रही हैं और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।यह सिर्फ पर्यावरण का नुकसान नहीं है, बल्कि उन मासूम खरीदारों के साथ भी एक बड़ा धोखा है जो अपनी गाढ़ी कमाई इन अवैध प्लॉट्स में लगा देंगे और बाद में जब प्रशासन की नींद टूटेगी, तो यहाँ बुल्डोजर चल जाएगा।सवाल सीधा मुख्यमंत्री और शासन से है—कि आखिर HRDA विभाग के किन अधिकारियों की सरपरस्ती में गंगा किनारे यह अवैध प्लॉटिंग फल-फूल रही है? इसकी जांच कब होगी और इन भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई कब की जाएगी?
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Tuesday, October 27

