हरिद्वार में कई कोचिंग संस्थान ऐसे चल रहे हैं जो नियम-कानून को खुली चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं। कहीं बिना रजिस्ट्रेशन के कोचिंग चल रही है, तो कहीं बेसमेंट में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कल को कोई बड़ा हादसा हो गया, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?हरिद्वार भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में बेसमेंट निर्माण और उसके इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम हैं। एचआरडीए समय-समय पर अवैध बेसमेंट पर कार्रवाई भी करता है, लेकिन इसके बावजूद कुछ भवनों के बेसमेंट में धड़ल्ले से कोचिंग संस्थान चल रहे हैं और हर रोज़ सैकड़ों छात्र वहां पहुंच रहे हैं।हाल ही में अग्निशमन विभाग ने कई कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया।
जांच में सामने आया कि कुछ संस्थानों के पास फायर एनओसी तक नहीं है। कई इमारतों में आने और बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है। अगर ऐसी जगह आग लग जाए या भगदड़ मच जाए, तो बच्चों के पास बाहर निकलने का दूसरा रास्ता ही नहीं होगा।जब इस बारे में अग्निशमन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि विभाग के पास सीधे चालान काटने का अधिकार नहीं है। ऐसी कार्रवाई जिला प्रशासन की मदद से ही की जा सकती है। विभाग पहले नोटिस देता है और संस्थान को कमियां दूर करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाता है।लेकिन यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। अगर नोटिस देने के बाद उन 15 दिनों के भीतर कोई बड़ा हादसा हो जाए, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?इस सवाल के जवाब में अधिकारी ने साफ कहा कि ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी कोचिंग संचालक की होगी।लेकिन सवाल सिर्फ कोचिंग संचालक तक सीमित नहीं है। अगर किसी इमारत में सिर्फ एक ही एंट्री और एग्जिट है, सुरक्षा मानक पूरे नहीं हैं, फायर एनओसी नहीं है, रजिस्ट्रेशन नहीं है और फिर भी वहां रोज़ बच्चों की क्लास लग रही है, तो जिला प्रशासन आखिर क्या कर रहा है?क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है? क्या कार्रवाई सिर्फ कागज़ों और नोटिसों तक सीमित रह गई है? अगर संस्थान नियमों का पालन नहीं कर रहे, तो उन्हें बंद क्यों नहीं कराया जा रहा?हरिद्वार में पढ़ने आने वाले छात्र और उनके अभिभावक यह मानकर कोचिंग भेजते हैं कि उनका बच्चा सुरक्षित रहेगा। लेकिन अगर सुरक्षा के बुनियादी इंतज़ाम ही नहीं हैं, तो यह सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि बच्चों की जान से खिलवाड़ है।अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग नोटिस जारी करने तक ही सीमित रहते हैं या फिर ऐसे संस्थानों पर सख्त कार्रवाई कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

