तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं, लेकिन कभी-कभी ये तस्वीरें वो सच बयां कर देती हैं जिसे महकमे के लोग ‘वाहवाही’ के पीछे छिपाना चाहते हैं। रुड़की रेलवे स्टेशन से आई इस तस्वीर को जरा गौर से देखिए। खाकी वर्दी में तैनात GRP के दो जांबाज सिपाही एक दिव्यांग शख्स को व्हीलचेयर समेत रेलवे ट्रैक पार कराते नजर आ रहे हैं। पहली नजर में तो ये ‘मदद’ और ‘इंसानियत’ की मिसाल लगती है… लेकिन जरा ठहरिए! क्या ये वाकई मदद है, या फिर अपनी पीठ थपथपाने के चक्कर में रेलवे के कड़े कानूनों की धज्जियां उड़ाना?रेलवे का साफ और सख्त नियम है कि कोई भी आम नागरिक या सुरक्षाकर्मी बिना किसी आपातकालीन अनुमति के रेलवे ट्रैक को इस तरह पैदल पार नहीं कर सकता। इसे ‘अनाधिकृत रूप से ट्रैक पार करना’ कहा जाता है, जो रेलवे अधिनियम की धारा 147 के तहत एक गंभीर और दंडनीय अपराध है।लेकिन रुड़की की GRP पुलिस को शायद इन नियमों से कोई सरोकार नहीं था। जिस दिव्यांग को सुरक्षित रूप से रेलवे स्टेशन पर बने ओवरब्रिज या रैंप के जरिए एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर ले जाना चाहिए था, उसे सीधे मौत के कुएं यानी लाइव रेलवे ट्रैक पर उतार दिया गया!सवाल है कि अगर ट्रैक पार कराते वक्त अचानक कोई हाई-स्पीड ट्रेन आ जाती, या व्हीलचेयर का पहिया पत्थरों के बीच फंस जाता, तो इस लापरवाही की कीमत कौन चुकाता? क्या वो दिव्यांग शख्स, या फिर ये खाकी वाले?वहीं सवाल यह भी है क्या रेलवे स्टेशन पर दिव्यांगों के लिए बना ओवरब्रिज सिर्फ दिखावे की चीज है? पुलिसकर्मियों ने रैंप या ब्रिज का इस्तेमाल करने के बजाय शॉर्टकट रास्ता क्यों चुना? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये सब कुछ सोशल मीडिया पर ‘सिंघम’ बनने और वाहवाही लूटने के चक्कर में किया गया मदद करना अच्छी बात है, और दिव्यांगों के प्रति संवेदनशीलता हर सुरक्षाकर्मी में होनी चाहिए। लेकिन संवेदनशीलता के नाम पर नियमों को ताक पर रख देना और किसी की जान को जोखिम में डालना कतई स्वीकार्य नहीं है। जो पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है, जब वही खुद कानून तोड़ने लगे, तो आम जनता से क्या उम्मीद की जाए?अब देखना ये होगा कि रुड़की रेलवे प्रशासन और GRP के उच्च अधिकारी अपनी ही पुलिस के इस ‘शॉर्टकट स्टंट’ पर क्या कार्रवाई करते हैं। क्या नियमों का हवाला देकर चालान काटने वाली पुलिस खुद के खिलाफ कोई एक्शन लेगी? या फिर ‘मदद’ के नाम पर इस गंभीर लापरवाही पर पर्दा डाल दिया जाएगा?
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Wednesday, June 10

