देहरादून। आरटीआई व सामाजिक कार्यकर्ता अनिल चंद्र बलूनी ने ऊर्जा विभाग और पिटकुल में कथित भ्रष्टाचार, नियमों में फेरबदल और एक विशेष अधिकारी प्रकाश चंद्र ध्यानी को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए। प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि आरटीआई के जरिए सामने आए तथ्यों से विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।बलूनी के अनुसार, प्रकाश चंद्र ध्यानी की तकनीकी अयोग्यता, कथित फर्जी दस्तावेज, सेवा अभिलेखों में अनियमितताओं और नियमों के विरुद्ध पदोन्नति को लेकर दायर जनहित याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 18 फरवरी 2026 को उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप न मानते हुए एमडी पद से हटाने के आदेश दिए थे। उन्होंने कहा कि पदोन्नति में कूटरचना और नियम विरुद्ध सेवा विस्तार जैसे मुद्दों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 16 अप्रैल 2026 के आदेश में याचिकाकर्ताओं को इन बिंदुओं को हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष उठाने की स्वतंत्रता दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायालय के रुख और जांच लंबित होने के बावजूद ध्यानी को दोबारा एमडी बनाने के लिए सेवा नियमावली में बदलाव किए गए। पहले जहां शीर्ष तकनीकी पदों के लिए बी-टेक अनिवार्य था, संशोधित नियमों में यह शर्त हटा दी गई तथा अधिकतम आयु सीमा 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी गई। साथ ही पिछले लगभग तीन वर्षों से नियमित नियुक्तियां न कर प्रभार आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया।बलूनी ने कहा कि एमडी चयन प्रक्रिया से जुड़ा एक गोपनीय स्क्रूटनी दस्तावेज वायरल होने से चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। वायरल रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान एमडी (यूपीसीएल) बुधियाल को अयोग्य माना गया, जबकि राजीव गुप्ता और नवीन गुप्ता को एसीआर अपूर्ण होने के आधार पर बाहर कर दिया गया। वहीं, गंभीर आरोपों और अदालती जांच का सामना कर रहे प्रकाश चंद्र ध्यानी को पात्र घोषित किया गया। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

