अवैध बेसमेंट और चार मंजिला इमारत, रुड़की में नियमों को ताक पर रख बनी बिल्डिंग पर क्यों सोया है विभाग?…
रुड़की के व्यस्ततम बीटी गंज बाजार में स्थित एक बहुचर्चित चार मंजिला इमारत इन दिनों शहर में चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। महज 10 फीट के संकरे रास्ते पर खड़ी इस विशाल इमारत के निर्माण ने अब हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली, एक आर्कीटेक्ट, J.E, A.E और उनकी भूमिका पर बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों और सूत्रों के हवाले से यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि आखिर इतने संकरे रास्ते पर इस बहुचर्चित चार मंजिला इमारत का नक्शा किस आधार पर पास कर दिया गया? आर्कीटेक्ट ने नियमों को जानते हुए भी ग़लत नक्शा पास कराया। नियमत निर्माण कार्य की अनुमति देने से पहले एचआरडीए के जूनियर इंजीनियर और A.E की जिम्मेदारी होती है कि वह स्वयं मौके पर जाकर जमीन रास्ते की चौड़ाई और सुरक्षा मानकों की गहन जांच-परख करें। ऐसे में जनता यह पूछ रही है कि क्या तत्कालीन जेई और A.E ने धरातल पर जाकर इस जगह का मुआयना करना भी मुनासिब नहीं समझा? या फिर जानबूझकर इस ओर से आंखें मूंद ली गईं?…
मामला सिर्फ नक्शा पास होने तक ही सीमित नहीं है। इस इमारत के निर्माण के दौरान नियमों को ताक पर रखकर कथित तौर पर एक अवैध बेसमेंट का निर्माण भी कर दिया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि जब बाजार के बीचो-बीच इतनी बड़ी बिल्डिंग बन रही थी और नीचे गहराई में अवैध रूप से बेसमेंट खोदा जा रहा था, तब विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और फील्ड स्टाफ को इसकी भनक तक नहीं लगी। क्या निर्माण कार्य के दौरान कभी मौके का निरीक्षण करने की जहमत नहीं उठाई गई?
अब जब यह गगनचुंबी इमारत पूरी तरह से बनकर मुकम्मल हो चुकी है और मीडिया में इस अवैध निर्माण की खबरें प्रमुखता से चलने लगी हैं, तब जाकर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की नींद टूटती नजर आ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब जब पानी सिर से ऊपर बह चुका है, तब अधिकारी कार्रवाई की बात कर रहे हैं। जनता के बीच अब यह बड़ा सवाल तैर रहा है कि क्या अधिकारी सचमुच इस पूरे मामले से बेखबर थे, या फिर अपनी लापरवाही और मिलीभगत को छुपाने के लिए अब अनजान होने का ढोंग रच रहे हैं? इस बहुमंजिला इमारत में छज्जे भी इतने बाहर निकाले गए है कि गली में दिन में ही रात लगती हैं, हादसा होने पर अग्निशमन की गाड़ीयां भी नहीं घुस सकती हैं। इस अवैध निर्माण करने वालों के हौसले बुलंद हैं और सत्ताधारी पार्टी का आशीर्वाद प्राप्त किया हुआ है जबकि मुख्यमंत्री इस तरह के अवैध निर्माण के सख्त खिलाफ हैं।
इस पूरे मामले ने एचआरडीए की साख पर एक बड़ा कड़ा प्रहार किया है। अब देखना यह होगा कि खबरों में आने के बाद विभाग इस बहुचर्चित अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने, बिल्डिंग सील करने
जैसी ठोस और निष्पक्ष कर्रवाई करता है, या फिर हमेशा की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
जब तक कारवाई नहीं तब तक मुहिम रहेगी जारी।

