ज़ब मानसून के सीजन में नदियों में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, तब विकास नगर की टॉस, आसन, सौरना और यमुना नदी के बीच ट्रैक्टर-ट्रॉली और मजदूर क्या कर रहे हैं?ये तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं। दिन के उजाले में पानी के बीच अवैध खनन की गतिविधियां साफ दिख रही हैं। जबकि मौसम विभाग ने पूरे प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी कर रखा है।बीते साल आसन नदी में खनन कर रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत कई मजदूर बह गए थे और कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। लेकिन उस हादसे के बाद भी स्थिति जस की तस नजर आ रही है। बारिश थमते ही नदी का जलस्तर गिरते ही फिर वही सिलसिला शुरू हो जाता है।खनन विभाग के अधिकारी अक्सर बयान देते रहते हैं कि अवैध खनन पूरी तरह बंद हो चुका है और सरकार को भारी राजस्व मिल रहा है। लेकिन ये तस्वीरें सवाल उठाती हैं कि क्या भारी राजस्व की आड़ में नदियों में हो रहा अवैध खनन नजरअंदाज किया जा रहा है?दिन के उजाले में इतने बड़े पैमाने पर खनन हो रहा है, फिर भी रोक-टोक क्यों नहीं हो पा रही? अगर रात के अंधेरे में चोरी-छुपे होता तो एक हद तक समझा जा सकता था, लेकिन खुले आम दिन-दहाड़े जान जोखिम में डालकर यह गतिविधि चल रही है।
सवाल स्वाभाविक है — जिला खनन अधिकारी और स्थानीय प्रशासन इन गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी क्यों नहीं रख पा रहे? हादसों का इंतजार क्यों किया जाता है? क्या बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन और सरकार को जवाब देना पड़ता है?ये खतरे भरी तस्वीरें खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। प्रशासन को तुरंत इन नदियों में अवैध खनन पर सख्ती बरतनी चाहिए, ताकि कोई नया हादसा न हो।

