उत्तराखंड में कायदे-कानूनों की धज्जियां उड़ाने का एक नया और बड़ा मामला सामने आया है! मामला भगवानपुर में देहरादून हाईवे स्थित रायपुर चौक का है, जहां नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर मार्केट-नुमा अवैध प्लॉटिंग विकसित कर दी गई है।सूत्रों का दावा है कि इस पूरे खेल के पीछे उत्तर प्रदेश के बिल्डर्स का हाथ है, जो देवभूमि में आकर बिना किसी डर के एचआरडीए (HRDA) यानी हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। बिना स्वीकृत ले-आउट, बिना वैध मंजूरी के हाईवे किनारे एक पूरा कमर्शियल हब तैयार कर ब्लॉक बेचे जा रहे हैं।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सब बिना प्रशासनिक शह के मुमकिन है? सूत्रों की मानें तो एचआरडीए के जिम्मेदार अधिकारियों से साठगांठ कर इस प्लॉटिंग का धंधा धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। जिस हाईवे पर दिन-रात अधिकारियों की गाड़ियां दौड़ती हैं, वहां इतना बड़ा अवैध निर्माण विकसित हो गया और अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी? या फिर आंखें मूंदने की ऐवज में ‘लेन-देन’ का खेल चल रहा है?एक तरफ आम जनता अगर बिना नक्शा पास कराए एक कमरा भी बना ले, तो एचआरडीए का पीला पंजा तुरंत ध्वस्तीकरण के लिए पहुंच जाता है। वहीं दूसरी तरफ, बाहरी बिल्डर आकर मुख्य हाईवे पर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और प्रशासन तमाशबीन बना बैठा है। सवाल है कि क्या एचआरडीए इस अवैध मार्केट प्लॉटिंग पर तुरंत सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा? और क्या नियमों को ठेंगा दिखाने वाले इन बाहरी बिल्डरों पर एफआईआर दर्ज होगी? या फिर हर बार की तरह जांच के नाम पर फाइलों को धूल चाटने के लिए छोड़ दिया जाएगा?शासन-प्रशासन की इस खामोशी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि खबर छपने के बाद एचआरडीए की नींद टूटती है या फिर भू-माफियाओं का यह खेल यूं ही जारी रहेगा।

