मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) में भवन मानचित्रों की स्वीकृति और कथित अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला अब शासन तक पहुंच गया है, जहां से पूरे प्रकरण की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, मार्च 2026 में शिकायतकर्ता ने MDDA क्षेत्र में नियमों के विरुद्ध कराए जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर शिकायत की थी। शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई न होने के बाद शिकायतकर्ता ने दोबारा शासन स्तर पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद शासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए।

शिकायत का संज्ञान लेते हुए 9 जुलाई 2026 को आवास अनुभाग-2 के उप सचिव रजनीश जैन ने MDDA उपाध्यक्ष को पत्र भेजकर प्रकरण की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए। शासन ने उपलब्ध अभिलेखों, स्वीकृत मानचित्रों, आदेशों, तकनीकी परीक्षण और संबंधित अधिकारियों की भूमिका समेत सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण कर जांच आख्या शासन को उपलब्ध कराने को कहा।
मामले को गंभीर बनाने वाला तथ्य यह है कि 7 अगस्त 2025 में स्वयं MDDA की ओर से स्टिल्ट पार्किंग को लेकर कार्यालय आदेश जारी किया गया था। आदेश में कहा गया था कि सिंगल ड्वेलिंग आवासीय यूनिट में स्टिल्ट पार्किंग केवल दो फ्लोर तक के प्रस्तावित भवन में अनुमन्य होगी। दो से अधिक तलों वाले सिंगल ड्वेलिंग आवासीय भवन के मानचित्र में स्टिल्ट पार्किंग अनुमन्य नहीं होगी। आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने और सभी संबंधित अधिकारियों को अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।

इसके बावजूद सामने आई MDDA की नोटशीट MAP/P/R/1138/25-26, File No. R/2289/25-26 में आवेदक चिराग पाठक के नाम से Residential Building—Single Dwelling Unit का प्रकरण दर्ज है। आवेदन 21 अगस्त 2025 को प्रस्तुत किया गया। नोटशीट में स्टिल्ट पार्किंग एफिडेविट सहित कई दस्तावेजों का उल्लेख है। 31 अगस्त 2025 को पिछली आपत्ति दूर नहीं होने और म्यूटेशन संलग्न न होने की टिप्पणी दर्ज की गई। इसके बाद 4 सितंबर 2025 को सचिव स्तर पर “OK” दर्ज किया गया, जबकि आगे तकनीकी सत्यापन को land use और ownership report के बाद किए जाने की टिप्पणी भी दर्ज हुई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि MDDA के अपने आदेश के बावजूद मानचित्रों की प्रक्रिया आगे बढ़ती रही और शिकायत किए जाने के बाद भी संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत में संबंधित इंजीनियर अजय कुमार मलिक की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। इसी वजह से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर MDDA के आदेशों का पालन कराने की जिम्मेदारी किसकी है और नियमों के विपरीत निर्माण अथवा मानचित्र स्वीकृति के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
अब शासन ने मामले की जांच के निर्देश दे दिए हैं। ऐसे में जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि MDDA के 7 अगस्त 2025 के आदेश के बाद संबंधित मानचित्र किस आधार पर आगे बढ़े, अधिकारियों की क्या भूमिका रही और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

