नेपाल में मूसलाधार बारिश के बाद बरसाती नदियों ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया है कि चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार और तबाही का मंजर है। अचानक आई बाढ़ (Flash Floods) ने पलक झपकते ही हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया, कई जिंदगियां पानी के तेज बहाव में समा गईं और करोड़ों का नुकसान हो चुका है।पहाड़ों पर कुदरत का यह कहर हमारे लिए एक चेतावनी है, लेकिन अफसोस कि हम आंखें मूंदकर बैठे हैं। नेपाल से सबक लेने के बजाय, उत्तराखंड के रुड़की में इंसान खुद अपनी बर्बादी की पटकथा लिख रहा है। दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित बढेड़ी राजपूताना में रतमऊ नदी के किनारे जो खेल चल रहा है, वह भविष्य में नेपाल जैसी ही किसी खौफनाक त्रासदी को दावत दे रहा है।
नेपाल की बरसाती नदियों में आया उफान यह बताने के लिए काफी है कि जब पहाड़ी नदियां अपना दायरा तोड़ती हैं, तो कंक्रीट के बड़े-बड़े ढांचे भी ताश के पत्तों की तरह ढह जाते हैं। ठीक यही मिजाज रुड़की की रतमऊ नदी का भी है। मानसून आते ही यह नदी किसी अजगर की तरह फुंकारने लगती है।इतिहास गवाह है कि इसी बढेड़ी राजपूताना इलाके में पहले ‘अरुण देव सिटी’ के नाम से कॉलोनी काटी गई थी। जब रतमऊ नदी में बाढ़ आई, तो लोगों के सपनों के आशियाने, सड़कें और बाउंड्री वॉल तिनके की तरह बह गए। खरीदारों की गाढ़ी कमाई पानी में डूब गई और मामला अदालतों तक पहुंचा।लेकिन नेपाल की ताजा तबाही और अपने खुद के अतीत से बेखबर, अब इसी खतरनाक जमीन पर ‘Riverside City’ के नाम से फिर से प्लॉटिंग का नया जाल बिछाया जा रहा है।नेपाल में जो तबाही आज कुदरत ने मचाई है, क्या रुड़की में कल वही तबाही प्रशासनिक अनदेखी के कारण होगी?NGT के स्पष्ट आदेश हैं कि नदी के फ्लड प्लेन में कोई निर्माण नहीं हो सकता। फिर हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की नाक के नीचे यह री-लॉन्चिंग कैसे हो रही है? अगर नेपाल की तरह रतमऊ नदी में कल जलप्रवाह बढ़ा और जन-धन की हानि हुई, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा, वे बिल्डर जो नाम बदलकर मौत का सामान बेच रहे हैं, या वे अधिकारी जो सब जानकर भी मौन हैं?नेपाल का दृश्य हमें डराने के लिए नहीं, बल्कि जगाने के लिए काफी है। नदी अपना रास्ता कभी नहीं भूलती, इंसान भले ही उसकी जमीन पर कब्जा कर ले। ‘Riverside City’ जैसे लुभावने विज्ञापनों के फेर में फंसने से पहले आम जनता को सोचना होगा, और प्रशासन को कागजी नींद से जागकर तुरंत इस अवैध निर्माण पर चाबुक चलाना होगा—इससे पहले कि नेपाल का खौफनाक सच रुड़की की जमीन पर दोहराया जाए।

