उत्तरकाशी में सरकारी धन के इस्तेमाल और सरकारी संपत्ति की देखरेख पर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई है। जिस शिक्षक आवास को बनाने में 87 लाख रुपये खर्च हुए, वही भवन महज तीन साल में खंडहर में तब्दील हो गया। झाड़ियां, गंदगी और टूटे दरवाजे-खिड़कियां सरकारी व्यवस्था की कहानी बयां कर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल—आखिर 87 लाख रुपये खर्च करने के बाद इस भवन का उपयोग क्यों नहीं हुआ? देखे एक रिपोर्ट

तस्वीरें उत्तरकाशी के राजकीय इंटर कॉलेज मुस्टिकसौड़ की हैं। यहां शिक्षक आवास के लिए वर्ष 2022 में 87 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई और वर्ष 2023 में भवन बनकर तैयार हो गया। निर्माण के बाद इसे शिक्षा विभाग को हैंडओवर किए जाने की बात कही गई।

लेकिन आज यही भवन सरकारी सिस्टम की लापरवाही का आईना बना हुआ है।भवन के चारों तरफ झाड़ियां और घास उग आई हैं। कमरों के दरवाजे-खिड़कियां टूटे पड़े हैं, पंखे उखड़े हुए हैं और नल की टोंटियां तक गायब हैं। कई कमरों में गंदगी का अंबार है।यानी जिस भवन पर 87 लाख रुपये खर्च किए गए, उसका रखरखाव तक नहीं हो सका।विभाग का कहना है यह भवन शिक्षा विभाग के माध्यम से विद्यालय को सौंप दिया गया था, जबकि राजकीय इंटर कॉलेज के प्रभारी प्रधानाचार्य का कहना है कि उन्हें न तो कोई एनओसी मिली और न ही भवन का हैंडओवर हुआ।

निर्माण निगम चंबा ने वर्ष 2023 में भवन का निर्माण पूरा किया था। सीमांत क्षेत्र के विकास के लिए स्वीकृत 87 लाख रुपये की राशि से बनी सरकारी संपत्ति आज उपयोग के बजाय बदहाली का उदाहरण बन गई है।ग्रामीण भी सरकारी धन की बर्बादी से हैरान है।स्थानीय क्षेत्र पंचायत सदस्य शंकर गुसाईं और पूर्व प्रधान सत्यनारायण सेमवाल ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

अब सवाल सिर्फ एक भवन की बदहाली का नहीं, बल्कि सरकारी धन, निर्माण की गुणवत्ता, हैंडओवर प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करने का है।तीन साल में खंडहर बने इस 87 लाख के शिक्षक आवास पर अब शिक्षा विभाग और संबंधित कार्यदायी संस्था को जवाब देना होगा—आखिर सरकारी धन की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है।

