रुड़की के मंगलौर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा में है मंगलौर की ‘ग्रीन एनक्लेव कॉलोनी’ दावा किया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण की टीम ने इस अवैध कॉलोनी पर ध्वस्तीकरण यानी डिमोलिशन की कार्रवाई का चाबुक चलाया था। लेकिन चौंकिए मत!

सूत्र बताते हैं कि यह बुलडोजर ज़मीन पर नहीं, बल्कि सिर्फ़ सरकारी फाइलों और कागजों में चला है। क्या है इस कथित ‘कागजी ध्वस्तीकरण’ का पूरा सच? देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट……

रुड़की के मंगलौर स्थित ग्रीन एनक्लेव कॉलोनी.. नाम जितना हरा-भरा है, आरोप उतने ही संगीन! स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाज़ार गर्म है कि हाल ही में एचआरडीए विभाग द्वारा इस कॉलोनी के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की बात कही गई थी। लेकिन जब धरातल पर जाकर देखा गया, तो नजारा कुछ और ही बयां कर रहा था। ज़मीन पर ना तो कोई दीवार टूटी दिखी और ना ही बुलडोजर के पंजों का कोई निशान मिला।

आरोप है कि अफसरों की सांठगांठ से कार्रवाई को सिर्फ और सिर्फ कागजों का पेट भरने के लिए दिखाया गया, जबकि मौके पर कॉलोनी जस की तस खड़ी है।बात सिर्फ कागजी बुलडोजर तक ही सीमित नहीं है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस कॉलोनी के निर्माण और प्लॉटिंग में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं।सूत्रों और शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कॉलोनी में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं।

यहां तक कि सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाने के लिए ‘स्टाम्प चोरी’ का बड़ा खेल भी खेला गया है। जमीनों की खरीद-फरोख्त में स्टाम्प ड्यूटी छिपाने के दावे अब जांच के दायरे में आ रहे हैं।अब सवाल यह उठता है कि क्या एचआरडीए के उच्च अधिकारी इस ‘कागजी कार्रवाई’ का संज्ञान लेंगे? या फिर शिकायतों का यह पुलिंदा यूं ही फाइलों में दबा रह जाएगा?

