रुड़की से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावों के बीच, रुड़की के सुनहरा मार्ग पर भू-माफियाओं ने नियमों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। यहां बिना किसी अनुमति के एक पूरी की पूरी अवैध कॉलोनी विकसित कर दी गई है।

लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और हैरान करने वाला मोड़ यह है कि इस अवैध कॉलोनी के ठीक ऊपर से हाई टेंशन बिजली की लाइन गुजर रही है। इसी जानलेवा हाई टेंशन लाइन के नीचे बिना किसी डर के बड़े-बड़े पक्के निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर एचआरडीए की आंखें अब तक क्यों बंद थीं? और उससे भी बड़ा सवाल विद्युत विभाग पर है कि जब यह कॉलोनी एचआरडीए से पास ही नहीं थी, तो विद्युत विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर यहां ट्रांसफार्मर कैसे लगा दिया?

इस अवैध कॉलोनी में बिजली की सप्लाई कैसे शुरू कर दी गई? तश्वीरो मे ठीक ऊपर देखिए ये मौत की वो हाई टेंशन लाइनें हैं जो कभी भी बड़े हादसे को दावत दे सकती हैं। और जरा नीचे देखिए, इसी मौत के साए के ठीक नीचे मजदूर बिना किसी सुरक्षा के बड़े-बड़े पक्के निर्माण कर रहे हैं।खुदा न खास्ता, अगर हाई वोल्टेज तारों की चपेट में आने से किसी मजदूर या गरीब की मौत हो जाती है, तो उस मौत का जिम्मेदार कौन होगा? क्या वो रसूखदार भू-माफिया जिम्मेदारी लेंगे, या फिर सरकारी महकमे अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल कर पल्ला झाड़ लेंगे?..

.जमीन के इन जादूगरों का खेल सिर्फ अवैध प्लॉटिंग तक सीमित नहीं है। इसमें सरकारी विभागों की मिलीभगत की बू साफ आ रही है। नियम कहते हैं कि बिना एचआरडीए के ले-आउट पास हुए किसी भी नई कॉलोनी में सरकारी बिजली का कनेक्शन या ट्रांसफार्मर नहीं लग सकता। लेकिन सुनहरा सलेमपुर राजपूताना मार्ग के इस अवैध खेल में विद्युत विभाग ने न सिर्फ आंखें मूंद लीं, बल्कि बकायदा ट्रांसफार्मर टांग कर पूरी कॉलोनी में धड़ल्ले से बिजली की सप्लाई भी चालू कर दी। आम जनता जब एक वैध कनेक्शन के लिए दफ्तरों के चक्कर काटती है, तो उसे नियमों का पाठ पढ़ाया जाता है। लेकिन भू-माफियाओं के लिए विद्युत विभाग ने लाल कालीन बिछा दी। क्या बिजली विभाग के अधिकारियों को ऊपर से गुजर रही हाई टेंशन लाइन और नीचे हो रहा अवैध निर्माण दिखाई नहीं दिया?मजदूरों ने दबी आवाज मे बताया कि साहब, यहां डर-डर के काम करना पड़ता है। ऊपर इतनी भारी बिजली की तारें हैं कि बरसात के दिनों में नीचे डर लगता है। लेकिन भू-माफिया कहते हैं कि हमने सब ‘मैनेज’ कर रखा है, बिजली विभाग से लेकर विकास प्राधिकरण तक सब सेटिंग है। तुम बस काम करो। अगर कल को कोई हादसा हो गया, तो हम गरीबों की जान की कीमत कौन लगाएगा?सवाल है कि बिना एचआरडीए की एनओसी और ले-आउट पास हुए, विद्युत विभाग ने इस अवैध कॉलोनी में ट्रांसफार्मर लगाने की मंजूरी किस अधिकारी के साइन से दी?दूसरा सवाल यह भी है कि हाई टेंशन लाइन के नीचे निर्माण कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित है, फिर भी वहां धड़ल्ले से लैंटर कैसे डाले जा रहे हैं? क्या एचआरडीए का फील्ड स्टाफ और जेई सिर्फ किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?बड़ा और आख़िरी सवाल है कि मुख्यमंत्री धामी के ‘जीरो टॉलरेंस’ के आदेशों को पलीता लगाने वाले एचआरडीए और विद्युत विभाग के इन भ्रष्ट अधिकारियों पर गाज कब गिरेगी?यह सिर्फ एक अवैध कॉलोनी का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे-साधे इंसानी जिंदगियों को मौत के कुएं में धकेलने का खुला खेल है। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद क्या एचआरडीए और विद्युत विभाग के बड़े अफसर कुंभकर्णी नींद से जागते हैं, या फिर हमेशा की तरह कागजी कार्रवाई की लीपापोती कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।


