केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी अपने ही मंत्रालय की योजना से अपने निजी कृषि प्रोजेक्ट के लिए करीब 99.6 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी मिलने के मामले में सवालों के घेरे में हैं। खोजी रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के अजमेर जिले के पीह गांव स्थित उनके फार्म पर खीरे की वाणिज्यिक खेती के लिए लगभग 1.99 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई, जिस पर राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना के तहत 50 प्रतिशत यानी करीब 99.6 लाख रुपये की सब्सिडी स्वीकृत हुई।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड कृषि मंत्रालय के अधीन आता है और भागीरथ चौधरी कृषि राज्य मंत्री होने के साथ-साथ बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष भी हैं, जिसके चलते हितों के टकराव (Conflict of Interest) को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री ने अप्रैल 2025 में आवेदन किया था और कुछ ही समय में परियोजना को मंजूरी मिल गई, जबकि मार्च 2026 में सब्सिडी की राशि उनके बैंक ऋण खाते में जारी कर दी गई। हालांकि मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि सब्सिडी मंजूर करने वाली समिति में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते और नियमों के तहत पात्र होने पर कोई भी किसान योजना का लाभ ले सकता है। इसके बावजूद सवाल यह उठ रहा है कि जिस मंत्रालय की योजना की निगरानी खुद मंत्री करते हैं, उसी योजना का लाभ उनके निजी प्रोजेक्ट को मिलने से पारदर्शिता और नैतिकता पर बहस छिड़ गई है। खबर सामने आने के बाद विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि मंत्री कार्यालय ने खबर प्रकाशित होने तक इस पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

