सोशल मीडिया पर आलीशान ग्राफिक्स, चौड़ी सड़कें, भव्य गार्डन, विशाल शंख स्मारक और लग्जरी लाइफस्टाइल के दावे… लेकिन सूत्रों से मिली तस्वीरें और जानकारी बिल्कुल अलग नजर आई। सवाल यह है कि क्या लोगों को सपने बेचकर निवेश के लिए लुभाया जा रहा है?
हरिद्वार के नसीरपुर कलां क्षेत्र में विकसित की जा रही “शंखनाद” नाम की कॉलोनी का सोशल मीडिया पर जमकर प्रचार किया जा रहा है। प्रचार सामग्री में विशाल शंख, सेवन चक्र गार्डन, चौड़ी सड़कें, शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर और लग्जरी टाउनशिप जैसी आकर्षक तस्वीरें दिखाकर लोगों को प्लॉट खरीदने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।लेकिन जब सूत्रों ओर जानकारी मिली तो वहां की तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां करती दिखाई दीं।

मौके पर कच्ची और मिट्टी वाली सड़कें, खाली मैदान और अधूरा विकास नजर आया। यानी सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही चमक-दमक और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिखाई देता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मौके पर अभी यह स्थिति है, तो फिर सोशल मीडिया पर भविष्य के ग्राफिक्स को वर्तमान की हकीकत की तरह दिखाकर लोगों को आखिर क्या संदेश दिया जा रहा है? क्या यह प्रचार लोगों को भ्रमित कर निवेश के लिए आकर्षित करने का माध्यम बन रहा है?
अब सवाल हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) पर भी खड़े होते हैं।
क्या प्राधिकरण ऐसे प्रचार पर नजर रख रहा है?
क्या कॉलोनी में दिखाए जा रहे सभी विकास कार्य और सुविधाएं स्वीकृत हैं?
और क्या आम जनता को दिखाई जा रही तस्वीरें वास्तविक स्थिति के अनुरूप हैं या सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा हैं?
सोशल स्कैन अपने दर्शकों को ऐसे ही जमीनी सच से रूबरू कराता रहेगा, ताकि कोई भी व्यक्ति सिर्फ आकर्षक ग्राफिक्स देखकर निवेश का फैसला न करे, बल्कि वास्तविक स्थिति भी जान सके।
वही सोशल स्कैन का सचिव आवास, उपाध्यक्ष हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण से गुजारिश है कि भ्रामक प्रचार कर जनता को लूटने वाले माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए जमीन पर खरीद-फरोख्त की रोक लगाई जाए और इस तरह के नक्शों को किसी भी सूरत में स्वीकृत नहीं किया जाना चाहिए।

