रुड़की के मंगलौर में विकास के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। मंगलौर में हाईवे किनारे विकसित की गई ‘न्यू एरा रेजिडेंसी’ इन दिनों चर्चाओं में है, लेकिन वजह खूबसूरती नहीं, बल्कि एक बड़ा खतरा है। सूत्रों और मौके पर लगे बोर्ड्स की मानें तो यह पूरी कॉलोनी एक हाई-प्रेशर गैस पाइपलाइन के ऊपर या उसके बेहद करीब बसाई जा रही है। आज हम पूछेंगे सवाल कि क्या चंद रुपयों के लिए मासूम खरीदारों की जान जोखिम में डाली जा रही है?…. पहले आप यह यह तश्वीर देखिए ये मंगलौर स्थित ‘न्यू एरा रेजिडेंसी’ की हैं यहाँ लगे ये चेतावनी बोर्ड साफ चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि यहाँ नीचे गैस पाइपलाइन गुजर रही है। नियम कहते हैं कि गैस पाइपलाइन के निर्धारित दायरे में किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण या प्लॉटिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है, क्योंकि एक छोटी सी चूक बड़े धमाके और जान-माल के नुकसान का कारण बन सकती है।लेकिन हैरानी की बात देखिए, जहाँ मौत की चेतावनी के बोर्ड लगे हैं, वहीं धड़ल्ले से प्लॉट काटे जा रहे हैं।मामले में ट्विस्ट यहीं खत्म नहीं होता। सूत्रों के हवाले से बेहद चौंकाने वाली जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि इस प्लॉटिंग का लेआउट तो पास कराने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन इसकी निर्धारित धनराशि विभाग में जमा ही नहीं की गई। यानी कागजों और जमीन के खेल में कहीं न कहीं बहुत बड़ा झोल है। अब हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के उच्च अधिकारी इस मामले की जांच की बात कह रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब कॉलोनी का लेआउट पास करने के लिए फाइल विभाग की मेज पर आई, तब क्या जिम्मेदार अधिकारियों की आंखों पर पट्टी बंधी थी?….यहाँ सबसे बड़ा सवाल हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण पर खड़ा होता है….क्या फाइल पास करते समय अधिकारियों को मौके पर मौजूद गैस पाइपलाइन की गाइडलाइन्स के बारे में जानकारी नहीं थी?
अगर जानकारी थी, तो क्या जानबूझकर इन सुरक्षा मानकों को अनदेखा किया गया?
बिना पूरी धनराशि जमा किए, निर्माण और प्लॉटिंग की प्रक्रिया यहाँ तक कैसे पहुँच गई?
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? या फिर रसूखदारों के आगे नियम-कायदों को ताक पर रख दिया गया है?
स्थानीय लोग और संभावित खरीदार असमंजस में हैं। अगर जांच में यह अवैध पाया जाता है, तो उन लोगों का क्या होगा जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई इन प्लॉट्स में लगा दी है? फिलहाल, HRDA के उच्च अधिकारियों के पाले में गेंद है, देखना होगा कि क्या वे इस अवैध और खतरनाक प्लॉटिंग पर बुलडोजर चलाएंगे या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

