उत्तराखंड में अवैध प्रतिनियुक्ति का मामला अब और गंभीर होता नजर आ रहा है। सबसे पहले इस मुद्दे को हमारे चैनल ने प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हुई। अब इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेशों के बावजूद कार्रवाई न होने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ऊर्जा विभाग में प्रतिनियुक्ति के मामलों के बाद अब सिंचाई विभाग के चार अभियंताओं—देवेन्द्र सिंह रावत, शैलेन्द्र सिंह रावत, सुरजीत सिंह रावत और विजय सिंह रावत—की प्रतिनियुक्ति चर्चा का विषय बनी हुई है।




सिंचाई विभाग ने 10 जून 2026 को पत्र जारी कर इन चारों अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति समाप्त करते हुए तत्काल मूल विभाग में लौटने के निर्देश दिए थे। साथ ही एक सप्ताह के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। लेकिन विभागीय आदेश के बावजूद इनकी वापसी नहीं होने से कई सवाल उठ रहे हैं।
इसी बीच इस मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। शासन की पत्रावली के अनुसार सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता देवेन्द्र सिंह रावत पिछले लगभग छह वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर आवास विभाग के अधीन हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण में तैनात हैं। पत्रावली के ई-नोट संख्या-94 पर माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 25 जून 2026 के बाद देवेन्द्र सिंह रावत को उनके मूल विभाग, यानी सिंचाई विभाग, वापस भेजे जाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

इसके बावजूद यदि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद भी संबंधित अधिकारी को मूल विभाग में वापस नहीं भेजा गया है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर आदेशों का पालन क्यों नहीं हो रहा? क्या मुख्यमंत्री के निर्देशों की अनदेखी की जा रही है, या फिर किसी स्तर पर उन्हें संरक्षण मिल रहा है?

देवेन्द्र सिंह रावत के संबंध में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को लेकर भी सचिव आवास द्वारा हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आ चुकी है। ऐसे में जांच और प्रतिनियुक्ति दोनों मामलों को लेकर शासन की भूमिका पर भी निगाहें टिकी हैं।
अब पूरे मामले में सबकी नजर सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार पर है। देखना होगा कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के अनुपालन में क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं और संबंधित अधिकारियों को मूल विभाग में भेजा जाता है या नहीं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की बात करते हैं, तो फिर उन्हीं के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने में देरी क्यों हो रही है? आने वाले दिनों में शासन इस पूरे मामले पर क्या कार्रवाई करता है, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।।।

