हरिद्वार: अब तक अवैध खनन में नेताओं और बड़े कारोबारियों के नाम सामने आते रहे हैं, लेकिन देहात क्षेत्रों में अब भारतीय किसान यूनियन का एक गुट भी इस धंधे में सक्रिय बताया जा रहा है। आरोप है कि गुट के प्रदेश अध्यक्ष ने क्रशर लगाया और चेलों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से लेकर अत्याधुनिक मशीनें उतार दीं। खनन पर रोक के बावजूद अधिकारियों पर दबाव बनाने और ओवरलोड वाहनों को चलाने में किसान राजनीति के इस्तेमाल की भी चर्चाएं हैं।एक जिले के बंजारे वाला क्षेत्र में, जहां खनन पर पूरी तरह रोक है, वहां रिजर्व पार्क से महज 400 मीटर के दायरे में अवैध खनन होने की बात सामने आई है। टाइगर रिजर्व और वन विभाग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय प्रभाव और दबाव के चलते कार्रवाई न होने की चर्चा है, जिससे यह धंधा बेखौफ चलता नजर आ रहा है।सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिनदहाड़े मशीनों से खनन और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से सामग्री क्रशर तक पहुंचाने का दृश्य दिखाई दे रहा है। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति खुद को स्थानीय किसान बताता है और प्रशासन की मिलीभगत, विरोध करने पर धमकी और किसान यूनियन की आड़ में धंधा चलने के आरोप लगाता है।ग्रामीणों के नाम का सहारा लेकर अवैध खनन को “किसान हित” बताकर सही ठहराने की कोशिश भी सामने आई है, जबकि यह पूरी तरह नियमों के खिलाफ है और इसे राजनीतिक कवच देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है
अब सवाल और बड़ा हो गया है…
“अब सवाल सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं रह गया है। हरिद्वार के अलग-अलग इलाकों से सामने आ रही ऐसी घटनाओं में बार-बार किसान यूनियन के तोमर गुट का नाम क्यों उभर रहा है? कभी अवैध खनन तो कभी जमीन के खेल…”
भगवानपुर में 140 बीघा जमीन पर खेल?
रुड़की (भगवानपुर): तेलपुरा के बुग्गावाला मार्ग पर करीब 140 बीघा जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जहां कभी हजारों फलदार पेड़ थे, वहां अब कंक्रीट का जाल बिछने के आरोप हैं। अवैध प्लॉटिंग और रातों-रात दुकानों के निर्माण की चर्चाएं हैं।मीडिया में मामला आने के बाद प्रशासन हरकत में तो दिखा, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति नजर आई। इस बीच विवादित परिसर में ‘भारतीय किसान यूनियन (तोमर)’ के प्रदेश कार्यालय का बोर्ड लगना सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, क्षेत्र में दिन-रात काम चल रहा है—बाग काट दिया गया और निर्माण जारी है, जबकि प्रशासन इससे इनकार कर रहा है। भगवानपुर एसडीएम डी.एस. नेगी ने कहा कि “मौके पर कोई निर्माण नहीं हो रहा”, जिससे सवाल और गहरे हो गए हैं।अगर निर्माण नहीं हो रहा, तो इमारत कौन बना रहा है? अगर बाग नहीं कटा, तो हजारों पेड़ कहां गए? और HRDA (हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण) की चुप्पी आखिर क्या संकेत दे रही है?
आखिरी सवाल
“आखिर ये महज संयोग है या इसके पीछे कोई संगठित पैटर्न काम कर रहा है? क्या प्रशासन इन कड़ियों को जोड़कर देख रहा है या जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?”

