एडवोकेट विकेश नेगी ने बद्रीनाथ-केदारनाथ समिति पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बद्रीनाथ में समिति स्तर पर घपले हो रहे हैं, जिसके बाद उन्होंने RTI के जरिए जानकारी जुटानी शुरू की।

नेगी के अनुसार जांच में सामने आया कि अनियमितताएं बड़े स्तर पर हो रही हैं और इसमें लोगों की आस्था तक को नहीं छोड़ा गया। उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ शुरुआती उदाहरण हैं और आगे इससे भी बड़े खुलासे हो सकते हैं

उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है और आरोप लगाया कि कुछ मामलों में फर्जी नियुक्तियों और पैसों के लेन-देन जैसी गड़बड़ियां भी सामने आई हैं। नेगी ने यह भी कहा कि वे इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे, लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई में जनता का साथ बेहद जरूरी है।

वहीं आरोपों के बीच एक मामला सामने आया है जिसमें कहा गया कि ऊपर उठने की ख्वाहिश विधायक और मंत्री बनने की है, लेकिन गिरावट का आलम यह है कि 12 हजार रुपये के लिए पत्नी को चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी बना दिया गया।
यह काम बद्री-केदार मंदिर समिति जैसी धार्मिक संस्था का उपाध्यक्ष होने के बावजूद किया गया,

जहां बद्री विशाल और बाबा केदार का भी भय नहीं रहा, जिसे उत्तराखंड के भविष्य पर सवाल खड़ा करने वाला बताया जा रहा है।


