बीते सितंबर माह में जनपद पौड़ी के पाबौ ब्लॉक के चैड़ गांव में घर पर प्रसव के दौरान एक महिला की मौत हो गई थी। महिला ने दम तोड़ने से पहले एक स्वस्थ नवजात को जन्म दिया था। उस समय यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर गई थी कि आखिर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं अस्पताल की जगह घर पर प्रसव करने को मजबूर क्यों हैं। अब इस संवेदनशील मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है, क्योंकि जन्मे हुए उस नवजात शिशु की भी लगभग एक माह बाद मृत्यु हो गई है। जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग का दावा था कि उसकी टीम नवजात की लगातार स्वास्थ्य जांच कर रही थी, लेकिन इसके बावजूद शिशु की मृत्यु ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उचित स्वास्थ्य सुविधाएं और देखभाल मुहैया कराई जाती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। उन्होंने अधिकारियों को घटना की विस्तृत जांच करने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिलाधिकारी ने लोगों से अपील की है कि प्रसव के लिए हमेशा स्वास्थ्य केंद्र का ही चयन करें। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाएं इसी उद्देश्य से उपलब्ध कराई गई हैं ताकि जच्चा-बच्चा दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने की आवश्यकता एक बार फिर इस घटना ने स्पष्ट कर दी है।
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Tuesday, October 27

