हरिद्वार के नसीरपुर कलां स्थित शंखनाद कॉलोनी को लेकर सोशल स्कैन द्वारा उठाए गए सवालों के बाद अब HRDA की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। सोशल स्कैन ने अपनी खबर में विशाल शंख स्मारक, सेवन चक्र गार्डन, चौड़ी सड़कें और लग्जरी टाउनशिप के सोशल मीडिया प्रचार तथा मौके की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाए थे। खबर के बाद प्राप्त शिकायत पर हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण ने क्षेत्रीय अभियंताओं से जांच कराई।30 अक्टूबर 2026 की जांच आख्या के आधार पर सचिव प्रत्यूष सिंह ने सचिव, उत्तराखंड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (RERA), देहरादून को पत्र संख्या 3453/विविध/2026-27 जारी किया।

पत्र में बड़ा खुलासा हुआ कि शंखनाद कॉलोनी का कोई मानचित्र HRDA से स्वीकृत नहीं है। श्रीराम औषधालय प्रबंधक द्वारा प्रस्तुत ले-आउट आवेदन संख्या HRDA/L/0025/26-27 अभी विचाराधीन है। इसके बावजूद मौके पर मानचित्र स्वीकृति से पहले भू-विन्यास और विकास कार्य किए जाने की बात जांच में सामने आई है। HRDA की रिपोर्ट के मुताबिक, मौके पर कॉलोनी फिलहाल खुले और खाली मैदान के रूप में है तथा कोई मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है। जांच में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विज्ञापन प्रदर्शित किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

HRDA ने शासनादेशों का हवाला देते हुए बताया कि यह क्षेत्र ऐसा स्थगन क्षेत्र है, जहां मानचित्र स्वीकृति ऐच्छिक है। इसी कारण प्राधिकरण ने अपने स्तर से कार्रवाई संभव नहीं बताते हुए मामला RERA को भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया है।अब सवाल RERA से है—क्या प्रचार में दिखाई जा रही सुविधाओं, निवेशकों को दी जा रही जानकारी और विकास कार्यों की जांच होगी? संबंधित आर्किटेक्ट और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी?

सोशल स्कैन की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, भ्रामक प्रचार पर रोक लगे और निवेशकों की मेहनत की कमाई सुरक्षित की जाए। खबर के बाद मामला HRDA की जांच से होता हुआ अब RERA तक पहुंच गया है। अब देखना होगा कि आगे क्या कार्रवाई होती है।

