जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, टिहरी में नियमों की अनदेखी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि तपोवन स्थित विष्णु पाणिग्रही, मनमोहन पोखरियाल, रवि अग्रवाल और अभिषेक अगीचा की सील्ड बिल्डिंगों में निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी हैं और जैसे ही कोई खबर चलती है तो दिखावे के लिए तुरंत कुछ समय के लिए काम रोक दिया जाता है। हदें पार करते हुए Decon Valley कॉलोनी में डेमोलिशन ऑर्डर वाली इमारतों में भी काम चलने की बात सामने आ रही है।

इस पूरे मामले में प्रतिनियुक्ति पर तैनात आलीशान इंजीनियर की कार्यशैली भी संदेह के घेरे में है। सवाल यह है कि सब कुछ जानते हुए भी उपजिलाधिकारी टिहरी की भूमिका क्या है—वे कार्रवाई करने में असमर्थ हैं या इसके पीछे कोई और वजह है? वहीं, जेल यात्रा करके आये हुए , भ्रष्टाचार के कईं संगीन आरोपों के बावजूद महत्वपूर्ण पद पर तैनाती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

क्या सियार के सामने अधीनस्थ अधिकारी नतमस्तक हैं? क्या इस सियार का खेल बदस्तूर जारी रहेगा, Loganathan केस में सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बावजूद अवैध उगाही में लिप्त अधिकारी पर सर्वोच्च कृपा जारी रहेगी?जब तक सियार पर कार्रवाई नहीं तब तक मुहिम रहेगी जारी!

