हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र में गंगा किनारे धड़ल्ले से काटी जा रही अवैध कॉलोनियों को लेकर हमारे चैनल ने लगातार प्रमुखता से खबरें दिखाईं। मकसद साफ था—सोए हुए प्रशासन और हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण को जगाना।खबर का असर तो हुआ, HRDA की टीम और बुलडोजर मौके पर पहुंचे भी… लेकिन कार्रवाई के नाम पर जो हुआ, उसने प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ध्वस्तीकरण की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले प्राधिकरण ने सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल सिर्फ ‘जंगली घास’ उखाड़ने के लिए किया!ये तस्वीरें हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र की हैं। गंगा के बेहद संवेदनशील और प्रतिबंधित इलाके में कॉलोनाइजर अवैध प्लॉटिंग कर रहे हैं।
जब हमारे चैनल ने इस बड़े खेल का पर्दाफाश किया, तो HRDA के अधिकारी हरकत में आए। लेकिन जब मौके पर पीली मशीन यानी बुलडोजर पहुंचा, तो कार्रवाई देखकर हर कोई हैरान रह गया।जिस बुलडोजर का काम अवैध निर्माणों और बाउंड्री वॉल को ध्वस्त करना होना चाहिए था, वह सिर्फ मैदान में उगी जंगली घास को कुरेदता नजर आया।ध्वस्तीकरण के नाम पर महज कागजी खानापूर्ति की गई और सरकारी तेल व संसाधनों की बर्बादी की गई। सवाल उठता है कि क्या HRDA के अधिकारी सिर्फ अपनी पीठ थपथपाने और फाइलों में कार्रवाई दर्ज करने के लिए यह औपचारिकता निभा रहे हैं?
सवाल है कि क्या कॉलोनाइजरों को संरक्षण दे रहा है प्राधिकरण?
गंगा किनारे अवैध प्लॉटिंग पर कार्रवाई से पीछे क्यों हट रहे अधिकारी? घास छीलकर जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश क्यों?
हमारे चैनल की पड़ताल आगे भी जारी रहेगी। हम प्रशासन से यह जवाब मांगते रहेंगे कि आखिर अवैध कॉलोनाइजरों पर ठोस और सख्त कार्रवाई कब होगी?

