हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र में कथित अवैध प्लॉटिंग और निर्माण के मामले में हमारी पिछली खबर के बाद अब हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण यानी HRDA ने ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। 15 जुलाई 2026 को जारी आदेश में संबंधित व्यक्ति को 15 दिनों के भीतर अनाधिकृत निर्माण और भू-विन्यास हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन यह समय-सीमा जुलाई के आखिर में ही पूरी हो चुकी है। अब सवाल है कि मौके पर कार्रवाई हुई या नहीं।HRDA के आदेश के मुताबिक श्यामपुर कांगड़ी में डिविजन कॉलेज के पास, श्मशान घाट के बगल में करीब 8 से 10 बीघा जमीन पर सड़क बनाकर प्लॉटिंग की गई और मौके पर विकास कार्य की कोई स्वीकृति प्रदर्शित नहीं की गई। प्राधिकरण के दस्तावेज में यह भी दर्ज है कि अवैध विकास की रिपोर्ट 7 अप्रैल 2025 को सामने आई थी। इसके बाद कारण बताओ नोटिस जारी कर काम रोकने के निर्देश दिए गए थे।
सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष ने शपथ-पत्र देकर कहा था कि मानचित्र स्वीकृत होने तक कोई निर्माण नहीं किया जाएगा। लेकिन 2 जुलाई 2026 की स्थलीय निरीक्षण रिपोर्ट में फिर निर्माण और भू-विन्यास का काम जारी पाए जाने का उल्लेख है। इसके बाद 7 जुलाई को दोबारा नोटिस जारी हुआ और 13 जुलाई को सुनवाई रखी गई, जिसमें संबंधित पक्ष अनुपस्थित रहा और कोई ठोस साक्ष्य भी नहीं दे सका।इसके बाद HRDA ने उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27 के तहत ध्वस्तीकरण आदेश पारित किया।

आदेश में कहा गया कि 15 दिन में स्वयं निर्माण हटाया जाए, अन्यथा HRDA कार्रवाई करेगा और खर्च भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूला जाएगा।अब सवाल यही है कि HRDA के आदेश का जमीन पर कितना पालन हुआ? क्या अनाधिकृत प्लॉटिंग और निर्माण हटाया गया या आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित है? गंगा के संवेदनशील क्षेत्र के नजदीक बताए जा रहे इस निर्माण पर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर है।

