रुड़की से इस वक्त की एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर खबर सामने आ रही है। जहाँ एक तरफ सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार पौधे लगाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ रुड़की में भू-माफिया खुलेआम प्रशासन की नाक के नीचे हरे-भरे बागों को उजाड़ने में लगे हैं।मामला अब्दुल कलाम चौक स्थित मंगलौर-सालियर बाईपास के किनारे का है, जहाँ एक बड़े क्षेत्रफल में फैले फलदार पेड़ों पर पहले तो बेरहमी से आरी चलवाकर उनका नामोनिशान मिटा दिया गया, और अब उसी जमीन पर बड़े स्तर पर अवैध प्लॉटिंग का धंधा बेहद तेजी से चमकाया जा रहा है।

यह जो तस्वीरें आप अपनी स्क्रीन पर देख रहे हैं, यह रुड़की के विकास की नहीं, बल्कि पर्यावरण के विनाश की तस्वीरें हैं। मंगलौर-सालियर बाईपास के किनारे अब्दुल कलाम चौक के पास स्थित इस बेशकीमती जमीन पर कभी फलदार पेड़ों की हरियाली हुआ करती थी।

लेकिन चंद पैसों के लालच में भू-माफियाओं ने पहले इस पूरे क्षेत्र के फलदार पेड़ों पर आरी चलवाकर उनका सफाया कर दिया। हैरानी की बात यह है कि जब इन पेड़ों को काटा जा रहा था, तब संबंधित विभाग गहरी नींद में सोया हुआ था। और अब, पेड़ों की बलि देने के बाद इस बड़े भू-भाग पर प्लॉटिंग विकसित करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

रातों-रात रास्ते बनाए जा रहे हैं, बाउंड्री वॉल खड़ी की जा रही हैं और भोले-भाले खरीदारों को फंसाने के लिए जाल बुना जा रहा है।स्थानीय निवासी का कहना है कि यहाँ पहले बहुत बड़ा बाग था। माफियाओं ने चुपके-चुपके सारे पेड़ कटवा दिए। अब यहाँ धड़ल्ले से प्लॉट काटे जा रहे हैं। हमें डर है कि बिना किसी अप्रूवल के यह अवैध कॉलोनी बसा दी जाएगी और बाद में खरीदार परेशान होंगे।इस पूरे मामले ने स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और रुड़की विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।सवाल है कि इतने बड़े पैमाने पर फलदार पेड़ कट गए, लेकिन वन विभाग को भनक तक क्यों नहीं लगी?दूसरा सवाल है कि बाईपास के किनारे खुलेआम चल रही इस अवैध प्लॉटिंग पर एचआरडीए का डंडा अब तक क्यों नहीं चला?तीसरा सवाल है क्या भू-माफियाओं को स्थानीय अधिकारियों का मूक संरक्षण प्राप्त है?देखना होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद शासन-प्रशासन इन भू-माफियाओं पर क्या कार्रवाई करता है या फिर इसी तरह रुड़की की हरियाली को कंक्रीट के जंगल में बदला जाता रहेगा।

