प्रदेश की सीमा पर बसें कुल्हाल गाँव के लोग सिस्टम की लापरवाही के चलते बूंद- बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं… तस्वीरे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती छेत्र मे बसें कुल्हाल गांव की है।
यमुना नदी के किनारे बसे इस गांव के लोग लंबे समय से पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं…
ऐसा नहीं है कि इस गांव में पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी, कुछ समय पहले तक सिंचाई विभाग के ट्यूबवेल के जरिए पूरे गांव को पानी मिला करता था।
लेकिन गाँव मे स्थाई और बेहतर पेयजल व्यवस्था देने के लिए सरकार ने जल जीवन मिशन योजना के तहत तकरीबन सवा 2 करोड़ रुपयों की पेयजल योजना का काम इस गाँव मे शुरू किया
फरवरी 2023 मे शुरू की गई ये योजना 22 फ़रवरी 2024 तक पूरी होनी थी… लेकिन तय समय सीमा से साल भर अधिक बीत जाने के बाद भी योजना पूरी तरीके से धरातल पर नहीं उतर पाई।
हर घर नल, हर घर जल पहुँचाने वाली इस योजना का लाभ अभी ग्रामीणो को मिलना शुरू भी नहीं हुआ था की ट्यूबवेल से मिलने वाला पानी किसी वजह से बंद हो गया।
अब जरा उत्तराखंड जल संस्थान के कर्मचारी और योजना को तैयार करने वाले ठेकेदार के इस कारनामें को भी देख लीजिये…..गाँव के हर घर पर योजना का लाभ देने वाले ऐसे बोर्ड तों लगा दिए गए, लेकिन बोर्ड लगे हुए ऐसे सेकड़ो घरों तक अभी पानी तों दूर पानी की लाइने तक नहीं पहुँच पाई।
ऐसे हालातो मे ग्रामीण दूर दराज से पानी की व्यवस्था करने को मजबूर है। ग्रामीणो को लाइनों मे लगकर पानी के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है…ग्रामीण दूर- दूर से पानी ढ़ोते भी नजर आ रहे है…
जल संस्थान के अधिकारी,कर्मचारी और ठेकेदार मिलकर सरकार की महत्वाकांशी योजना पर पलिता लगाने मे जुटे हुए है।
अब देखना होगा की आखिर कब तक इस गाँव के लोगो को पानी की किल्लत से राहत मिल पाएगी।

