कोटद्वार में प्रतिबंधित पोकलैंड से कर रहे हैं खनन, प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप
कोटद्वार में नदियों में पट्टों के नाम हो रहे अवैध खनन की शिकायत के बाद सिंचाई विभाग ने भी खनन मामले में गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं।
गौरमतलब है कि सरकार एक तरफ लगातार रिवर ड्रेजिंग के नाम पर हर साल पट्टे जारी कर रही है और साथ ही नदियों में कई स्थानों पर स्थाई पट्टे भी जारी किये हुए हैं ।

सूचना आयोग में इन्हीं पट्टों के संबंध में हुई अनियमितता की सूचना मामले में सामने आया कि पट्टों को जारी करने के लिए बनी नियमावली का संबंधित विभागों द्वारा अनदेखी कर पट्टों को जारी कर अवैध खनन करवाया जा रहा है और अवैध खनन में प्रतिबंधित पोकलैंड मशीनें लगा कर नदियों के प्रतिबंधित किनारों पर भी गहरे गड्ढे कर दिये गए हैं,जिससे नदी किनारे बने मकानों के साथ साथ सिंचाई विभाग की सुरक्षा दीवारों को भी खतरा पैदा हो गया है ।शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी गढ़वाल को नदियों में चल रही अवैध पोकलैंड से नदियों में अंधाधुंध खनन किए जाने की वीडियो प्रेषित किए जाने के बाद सिंचाई विभाग द्वारा भी नदियों में हो रहे मानकों के विरुद्ध अवैध खनन की पुष्टि कर यह भी अवगत कराया है कि स्वीकृति के समय सिंचाई विभाग को पूछा ही नहीं गया और न ही अनुबंध की प्रति उपलब्ध कराई गई जिससे निर्गत पट्टों के सीमांकन का पता चल सके। अवैध खनन से सिंचाई विभाग की दीवारों को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।आरोप है कि न तो पट्टों का सही सीमांकन किया गया है, न ही सीसीटीवी लगाए गए हैं और न ही धर्मकांटा लगाया गया है, उससे बावजूद खनन चलने दिया जा रहा है जो कि पुलिस प्रशासन की मिलीभगत की पुष्टि करता है ।शिकायतकर्ता ने कहा कि खनन पर्यवेक्षक को अवैध खनन की शिकायत करने पर खनन पट्टा धारक शिकायतकर्ता के घर पहुँच जाते हैं, जो कि सुरक्षा की दृष्टि से बेहद खतरनाक बात है , ऐसे में किसी के साथ किसी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी इन अधिकारियों की होगी ।

