आगामी बजट की तैयारी के बीच उत्तराखंड सरकार ने इस वर्ष आर्थिक सर्वेक्षण को अधिक पेशेवर और व्यापक बनाने के लिए नई पहल की है। नियोजन विभाग द्वारा हर साल कराए जाने वाले आर्थिक सर्वेक्षण को इस बार बाहरी विशेषज्ञ संस्था के सहयोग से तैयार किया गया है, ताकि राज्य की आर्थिक प्रगति का अधिक सटीक आकलन किया जा सके और बजट निर्माण के लिए स्पष्ट दिशा मिल सके। राज्य की प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने प्रेस वार्ता में बताया कि आर्थिक सर्वेक्षण किसी भी वित्तीय वर्ष में विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का समग्र आकलन प्रस्तुत करता है। इसके आधार पर सरकार यह तय करती है कि आने वाले बजट में किन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना है और विकास की दिशा क्या होगी। उन्होंने कहा कि पिछले साल से आर्थिक सर्वेक्षण के प्रमुख संकेतकों को साझा करने के लिए बजट से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस की परंपरा शुरू की गई है, जैसा कि केंद्र सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा किया जाता है।डॉ. सुंदरम ने बताया कि पहले आर्थिक सर्वेक्षण पूरी तरह विभागीय स्तर पर ही तैयार किया जाता था, जिसमें अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग की टीम काम करती थी। लेकिन इस बार गुणवत्ता और पेशेवर दृष्टिकोण को मजबूत करने के उद्देश्य से National Council of Applied Economic Research को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया। यह संस्था भारत सरकार से संबद्ध एक प्रमुख आर्थिक शोध संगठन है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का आर्थिक सर्वेक्षण एक संयुक्त प्रयास के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें एनसीएईआर और राज्य के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग की टीम ने मिलकर काम किया है। सर्वेक्षण में राज्य की आर्थिक स्थिति, विकास दर, विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियों और चुनौतियों से जुड़े प्रमुख आंकड़े शामिल किए गए हैं। प्रमुख सचिव ने बताया कि सर्वेक्षण की प्रमुख निष्कर्षों और आंकड़ों को सार्वजनिक किया जा रहा है, जिससे सरकार की नीतियों और बजट की प्राथमिकताओं को समझने में मदद मिलेगी। यह दस्तावेज वित्त विभाग के लिए एक मार्गदर्शक की तरह काम करता है और आने वाले बजट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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Thursday, March 26

