पत्रकार हेम भट्ट ने अपनी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि ….
आप मुझे डराने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन मैं हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हूँ। अपनी शक्ति का उपयोग कर आप मुझे रोकने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन मेरी आवाज़ को दबाना असंभव है। 6 फरवरी की शाम राजधानी देहरादून में मुझ पर हुए हमले को पुलिस ने रोड रेज करार दिया है, लेकिन मेरे सवालों का जवाब अभी भी नहीं मिला है।

सवाल 1- 5 फरवरी की रात जय भारत टीवी का फेसबुक पेज बंद करा दिया गया। ये किसके कहने पर हुआ और क्यों? जबकि हम साइबर पुलिस को पहले ही शिकायत दे चुके हैं। हमें न्याय चाहिए।
सवाल 2- चैनल बंद होने के कुछ घंटे बाद मुझ पर जिस अंदाज में हमला हुआ, क्या ये महज इत्तफाक है?
सवाल 3- पुलिस ने 3 में से जिन दो हमलावरों को पकड़ा, वो कौन थे? क्योंकि पुलिस ने मुझे कोई जानकारी नहीं दी है, मुझसे आरोपियों की शिनाख्त भी नहीं कराई गई। कैसे माना जाए कि ये वही हमलावार थे?
सवाल 4- पुलिस ने घटना को रोड रेज बताया है, इसका प्रूफ क्या है? घटना के सीसी फुटेज जारी क्यों नहीं हुए?
सीसी कैमरा फुटेज जारी करने में हो रही देरी भी अब शंका पैदा करती है।
सवाल 5- सीसी कैमरे थे भी या नहीं? अगर नहीं थे, तो क्या साफ नहीं हो जाता कि हमलावारों ने सोच समझकर उस जगह को चुना?
सवाल 6- क्या केवल आरोपियों के बयान से ये मान लिया गया कि ये रोड रेज की घटना थी? पीड़ित का पक्ष क्यों नहीं सुना गया?
सवाल 7- क्या ये अपराधियों के लिए बचने का रास्ता नहीं बन जायेगा? कि राह चलते किसी आम व्यक्ति पर हमला करो, पीटो, मारो और फिर कह दो कि ये तो रोड रेज था।
हम अपने साथ हुए अन्याय के लिए संवैधानिक तरीके से लड़ाई लड़ेंगे, झुकेंगे नहीं, डरेंगे नहीं।

