विकासनगर के कुंजा ग्रांट गाँव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिछले 15 सालों से केवल अटैचमेंट पर चल रहा है। राजधानी देहरादून से मात्र 40 किलोमीटर दूर बसे इस गाँव के अस्पताल में दो एमबीबीएस डॉक्टरों (आयुर्वेदिक और एलोपैथिक) के पद स्वीकृत हैं, लेकिन आज तक एक भी स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हुई। नतीजतन, यह अस्पताल 20,000 से अधिक की आबादी वाले आधा दर्जन गाँवों की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने में नाकाम रहा है।
दरअसल साल 2001 में गाँव के समाजसेवी हृदय सिंह तोमर ने अपने पिता दौलत सिंह के नाम पर दो बीघा जमीन इस अस्पताल के लिए दान दी थी। उनकी उम्मीद थी कि यह अस्पताल स्थानीय किसानों और मजदूरों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ देगा। 21 लाख 35 हजार रुपये की लागत से फरवरी 2010 में अस्पताल बनकर तैयार हुआ, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते यह केवल एक अस्थायी डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। लाखों की लागत से बनी यह इमारत अब जर्जर हालत में है, और ग्रामीणों को छोटी-मोटी बीमारियों के लिए भी देहरादून का रुख करना पड़ता है।
कुंजाग्रांट ग्राम प्रधान ने बताया 15 साल हो गए, लेकिन अस्पताल में स्थायी डॉक्टर नहीं आए। अटैचमेंट पर चल रहा यह अस्पताल । सरकार से माँग है कि जल्द स्थायी डॉक्टरों की नियुक्ति हो।”
ग्राम पंचायत आदुवाला प्रधान प्रतिनिधि, रामपाल सिंह ने कहा इस क्षेत्र में ज्यादातर (एसटी) अनुसूचित जनजाति”
के लोग निवास करते है।
लेकिन डॉक्टर की स्थाई नियुक्ति न होने से ग्रामीणों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता, सचिन कुमार बताते हैं कि हृदय सिंह तोमर का सपना था कि गाँव में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ हों। लेकिन बिना डॉक्टरों के यह अस्पताल बेकार है। सरकार इसे गंभीरता से ले। ग्रामीणों की माँग
कुंजा ग्रांट और आसपास के गाँवों के लोग माँग कर रहे हैं कि अस्पताल में जल्द से जल्द स्थायी डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए, ताकि उनकी स्वास्थ्य जरूरतें पूरी हो सकें और हृदय सिंह तोमर का सपना साकार हो। अब सवाल यह है कि आखिर कब तक ये ग्रामीण बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए इंतज़ार करेंगे? क्या सरकार अब इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी ?

