IAS/IPS/UPSC
आईएएस में चयनित विद्यार्थियों को लेकर भाषायी, क्षेत्रीय, लैंगिक गर्व हर साल हिलोरें मारता है। इन सबसे ज्यादा और सबसे ऊपर जातीय गर्व होता है। यह होड़ लगती है कि किस जाति के कितने लोग सलेक्ट हुए?
आईएएस और आईपीएस को लेकर एक सामान्य अनुभव बताता हूँ। सरदार पटेल ने आईएएस को सत्ता का स्टील फ्रेमवर्क कहा था, वह आज भी कायम है।
बेसिकली अगर कोई आईएएस बन गया तो वह मनुष्य रह ही नहीं जाता। वह इंसान जैसा दिख रहा जीव एक प्रोग्राम्ड, ब्रेनवाश्ड जीव सत्ता का गुलाम होता है। अगर पटेल और नेहरू की सत्ता है तो ये तबका नैतिक चरित्रवान, ईमानदार रहेगा। अगर आपने भ्रष्ट, चरित्रहीन, दंगाई, लंपट शासक चुन दिया है तो यह इंसान दिखने वाला प्रोग्राम्ड, कम्यूटराइज्ड, रोबोटिक जीव निहायत चरित्रहीन, निहायत भ्रष्ट, निहायत मानवद्रोही बन जाता है।
ऐसा नहीं कि यह इंसान दिखने वाला रोबोट केवल समाज के लिए मुसीबत है। यह इंसान अपने परिवार के लिए और खुद के लिए भी मुसीबत होता है क्योंकि मनुष्यता, प्रेम, दया, करुणा जैसे इनबिल्ट मानवीय गुण इनमें बचते ही नहीं है।
आपके आसपास इस समय कोई आईएएस हो तो उसकी स्थिति देखें, अगर वह ताकतवर पद पर है; वह चरित्रहीन होगा; दारुबाज होगा। बीवी से उसका इस कदर झगड़ा होगा कि मौका पाते ही उसको निपटा देगी। चौबीस घण्टे वह हाय पैसा हाय पैसा करने और दलाली करने में लगा होगा। ऐसा क्यों?
वही मामला सरदार पटेल वाला कि आईएएस अधिकारी सत्ता का स्टील फ्रेम होता है। सत्ता में बैठे लोग जैसे हैं, आईएएस लॉबी उसी का स्टील फ्रेम बनी रहती है।
हमारी कोशिश है कि मनुष्य ही आईएएस बनें, या कहें कि कोई बच्चा आईएएस बनने के बाद भी मनुष्य बना रहे। मुझे नहीं लगता कि अब तक इसमें कोई सफलता मिल पाई है। पीसीएस, पीपीएस या यूपीएससी से सलेक्ट होने वाले आईएएस, आईपीएस के नीचे के रैंक वाले तो मनुष्य बने रहते है एक हद तक। लेकिन आईएएस? बैड एक्सपीरियंस😢
आईएएस अधिकारी धूर्त, गुलाम के साथ मूर्ख भी होते हैं। जनता में उनकी कोई आस्था नहीं होती है, उनकी आस्था सिर्फ और सिर्फ सत्ता में होती है। मुख्यमंत्री उन्हें मुर्गा बनने को कह दे तो तुरंत कान पकड़कर मुर्गा बनकर खड़े हो जाएंगे। ये लोग जब रिटायर होने को होते हैं तो क्रांतिकारी हो जाते हैं, जातीय संगठनों में सक्रिय हो जाते है, क्योंकि पॉवर जाते हुए दिखती है और बाल बच्चे भी इन्ही की भांति अमानुषिक, भ्रष्ट, लंपट, मवाली हो चुके होते है।
तो जस्ट चिल।
अगर अपना कल्याण चाहते हों तो अच्छा नेता चुनिए। आईएएस आपके काम के नहीं हैं। ये सत्ता के स्टील फ्रेम ही हैं।
यही हाल डॉक्टरों की है। उनका पढ़ाई का 10 साल का स्ट्रक्सचर ऐसा है कि वह कारपोरेट अस्पतालों के गुलाम बनने वाले हैं। उसके लिए भी हमे कोशिश करनी है कि कुछ अच्छे डॉक्टर भी बचे रहें.

