पहाडों की रानी मसूरी में भूमि माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि वे अब खुलेआम प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़ कर रहे हैं वह भी प्रशासन की मिलीभगत या निष्क्रियता के साये में। हाल ही में स्प्रिंग रोड क्षेत्र में सामने आए एक गंभीर मामले ने पूरे मसूरी को हिला कर रख दिया है।
स्थानीय निवासी नितिन गुप्ता ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा उनके घर के पास से गुजरने वाले प्राकृतिक नाले की दिशा बदलने की कोशिश की जा रही थी। पाइपलाइन के माध्यम से पानी को सड़क के नीचे से दूसरी दिशा में ले जाया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि यह अवैध कार्य भारी बारिश के ठीक बाद, देर रात, जेसीब मशीन के जरिए किया जा रहा था। उनका कहना है कि हाल की बारिशों में उनके घर के जूडी सडक और नाला पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुका है। ऐसे में यदि नाले की दिशा बदली जाती है तो उनका घर और भी गंभीर खतरे में आ जाएगा। उन्होने बताया कि जब स्थानीय मीडिया ने वन विभाग और नगर पालिका परिषद को इस बारे में सूचित किया, तब जाकर दोनों विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे और तुरंत काम को रुकवाया।
मसूरी डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि उन्होंने रेंजर को मौके पर भेजा और एक विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा, मसूरी के हरे-भरे जंगलों से किसी को भी खेलने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अगर कोई नियमों के खिलाफ पाया गया, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी
बता दे कि मसूरी की कैरिंग कैपासीटी यानी कि यह क्षेत्र जितनी जनसंख्या, निर्माण, ट्रैफिक और पर्यावरणीय दबाव सह सकता है लंबे समय से पार हो चुकी है। बेतरतीब निर्माण, अवैध प्लॉटिंग, जल स्रोतों पर अतिक्रमण, और प्राकृतिक नालों के साथ छेड़छाड़, ये सभी संकेत हैं कि मसूरी अब प्राकृतिक आपदा के मुहाने पर खड़ी है। 2022 में आई एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, मसूरी की अधिकतम कैपेसिटी 15,000 पर्यटकों और 25,000 स्थायी निवासियों के लिए थी, जबकि हकीकत में यह संख्या कई गुना अधिक है। जल स्रोत सूख रहे हैं, ट्रैफिक चरम पर है, और हर बारिश के बाद भूस्खलन का खतरा बढ़ता जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है ।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह के कार्यों को नहीं रोका गया, तो मसूरी एक पर्यटन स्थल से आपदा क्षेत्र में तब्दील हो जाएगी। नितिन गुप्ता और अन्य स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है किरू अवैध निर्माण पर तुरंत स्थगन आदेश लगाया जाए। पर्यावरणीय नुकसान की स्वतंत्र जांच कराई जाए।दोषियों चाहे वे निजी हों या सरकारी कर्मचारी पर आपदा प्रबंधन कानून के तहत कार्रवाई की जाए।

