Browsing: धर्म

सावन के महीने में भोलेनाथ की चर्चा हो तो उनके विवाह का प्रसंग जरूर आता है. दरअसल ब्रह्मा की सृष्टि में ऐसा विवाह ना तो कभी हुआ और न ही कभी होगा. इस विवाह में दूल्हे का स्वरुप तो अनूठा था ही, बाराती भी एक से बढ़कर एक थे. दूल्हा बने बाबा खुद नंदी पर सवार होकर दिगंबर अवस्था में ही ससुराल पहुंचे. उनके साथ चल रहे बाराती भी किसी सभ्य समाज के लोग नहीं थे, बल्कि सभी के सभी उनके अपने गण थे. जैसे ही यह बारात राजा हिमाचल के जनवासे में पहुंची, बारात देखने आए लोगों की हालात […]

Read More

सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के घरों में समय-समय पर सत्य नारायण भगवान की कथा तो होती ही होगी. क्या आप जानते हैं कि सत्य नारायण भगवान की पहली कथा कब और कहां हुई थी? इस कथा को सबसे पहले किसने कहा था और किसने सुना था? यदि नहीं, तो शास्त्रों के हवाले से यहां हम आपको बताने जा रहे हैं. श्रीमद भागवत महापुराण और स्कंद पुराण के मुताबिक भगवान शिव इस कथा को सबसे पहले कहा था. इन दोनों ही ग्रंथों में माता पार्वती को पहली श्रोता का दर्जा हासिल है. इन दोनों ही ग्रंथों में बार-बार यह […]

Read More

भगवान शिव हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पूजनीय देवताओं में से एक माने जाते हैं. ये सभी देवों में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं, इसलिए ही भगवान शिव को देवाधिदेव महादेव भी कहा जाता है. भोलेनाथ अनादि, अनंत, और स्वयंभू हैं. भगवान शिव जब सभी देवताओं में श्रेष्ठ हैं तो मन में जिज्ञासा उठती है कि उनके माता पिता कौन हैं? क्योंकि भगवान शिव के माता पिता को लेकर ज्यादातर भक्तजन अंजान हैं. श्रीमद् देवी भागवत पुराण में भगवान शिव के जन्म से जुड़ी कथा का जिक्र किया गया है. कुछ और धार्मिक ग्रंथों में भी भगवान शिव के जन्म […]

Read More

भगवान शिव की जो अवधारणा हमारे दिमाग में है, उसमें वह हमेशा त्रिशूल धारण करते हैं और डमरू बजाते हैं. यह अवधारणा शिव पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित विभिन्न प्रसंगों से बनी है. इन पुराणों में भगवान शिव के त्रिशूल और डमरू का विशेष महत्व बताया गया है. शिवपुराण के एक प्रसंग में त्रिशूल को कफ, वात और पित कहा गया है. कहा गया है कि त्रिशूल पर नियंत्रण हासिल करने के बाद व्यक्ति को संसार की चिंता नहीं रहती. ऐसे व्यक्ति का मन विचलित नहीं होता और वह सहज समाधि का प्राप्त कर सकता है. शिवपुराण के ही […]

Read More

भगवान शिव को देवों का देव महादेव कहा जाता है. भोलेनाथ की कृपा अगर किसी व्यक्ति को प्राप्त हो जाए, तो उसे जीवन में हर क्षेत्र में सफलता मिलती है. सावन का महीना शिव जी को प्रसन्न करने के लिए सबसे सर्वोत्तम माना गया है. ऐसे में अगर आप भगवान शिव के प्रिय मास सावन में शिव मंत्रों का जाप करते हैं तो आपको विशेष लाभ प्राप्त हो सकते हैं. इन मंत्रों के जाप से मानसिक और शारीरिक सुकून मिलता है और सभी मनोकामनाएं भी भोलेनाथ पूरा कर देते हैं. आइए जानते हैं भगवान शिव के इन मंत्रों के बारे […]

Read More

हिंदू धर्म में बहुत से देवी देवता हैं लेकिन इन सब में सिर्फ भगवान शिव ही एक मात्र ऐसे देवता हैं जिनको साकार रूप के साथ साथ, शिवलिंग के रूप में निराकार रूप में भी पूजा जाता है. भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए उनके निराकार स्वरूप शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है और पूजा अर्चना की जाती है. शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई और पहली बार किसने शिवलिंग की पूजा अर्चना की थी, इसके बारे में शिव पुराण में बताया गया है. शिवलिंग के उत्पत्ति की पौराणिक कथा पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु […]

Read More

हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग विशेष महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. भारत में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं, ये सब ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की अनंत ऊर्जा का स्वरूप माने जाते हैं. इन 12 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग सबसे पहले नंबर पर आता है. यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित है. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का बहुत खास महत्व माना जाता है. इस ज्योतिर्लिंग के बारे में मान्यता है कि इसका निर्माण स्वयं चंद्रदेव के द्वारा किया गया है. सोमनाथ मंदिर में भगवान शिव का पूजन विशेष विधि-विधान से किया जाता है. सोमनाथ का अर्थ है ‘सोम के स्वामी’, जो चंद्रमा […]

Read More

भगवान राम चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अवतार लिए. यह कहानी तो सबको पता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान राम माता कौशल्या के गर्भ में कितने दिन रहे. यदि नहीं, तो आज हम इसी प्रसंग की चर्चा करने वाले हैं. गोस्वामी तुलसी दास ने श्रीराम चरित मानस में इस प्रसंग का वर्णन विस्तार से किया है. इसके अलावा महर्षि भारद्वाज और याज्ञवल्क्य मुनि के संवाद में भी इस प्रसंग का जिक्र मिलता है. इसमें कहा गया है कि भगवान राम माता कौशल्या के गर्भ में 12 महीने तक रहे थे. श्रीरामचरित मानस में […]

Read More

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ पूर्णिमा मनाई जाती है. मान्यता है कि आषाढ़ पूर्णिमा सभी पूर्णिमाओं में सबसे खास होती है. इस बार 20 जुलाई 2024, दिन शनिवार को आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा और अगले दिन 21 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा का स्नान दान आदि कार्य होंगे. इस दिन दान पुण्य करना भी बहुत शुभ माना जाता है. इस दौरान, लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनके लिए तर्पण और दान करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन स्नान-दान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य प्राप्त होता […]

Read More

अक्सर देखा जा रहा है कि लोग पूजा में बैठते समय रूमाल या तौलिया सिर पर रख लेते हैं. इस बात को लेकर अक्सर पूछा जाता है कि क्या ऐसा करना उचित है? जबकि शास्त्रों में सिर ढकने का निषेध है. हमारे धर्म शास्त्र केवल शौच के समय ही सिर ढकने की सलाह देते हैं. वहीं किसी को प्रणाम करते समय, जप-पूजा ओर हवन करते समय सिर खुला रखने का विधान करते हैं. सनातन धर्म के तमाम शाष्त्रों के मुताबिक पूजा हवन आदि में सिर खुले रहेंगे तो ही अभीष्ठ फल की प्राप्ति होगी. आज इस खबर में हम उन्हीं […]

Read More

शास्त्रों में गुप्त नवरात्रि को बहुत ही शुभ और महत्वपूर्ण माना गया है और इस दौरान सभी दस महाविद्या की पूजा अर्चना करने का विधान है. जिसके अनुसार, नौवें दिन मां मातंगी की पूजा की जाती है. यह तंत्र की देवी हैं, वचन की देवी हैं. यह एकमात्र ऐसी देवी हैं, जिनके लिए व्रत नहीं रखा जाता है. यह केवल मन और वचन से ही तृप्त हो जाती हैं. मां मातंगी का स्वरूप शास्त्रों के अनुसार मतंग भगवान शिव का ही एक नाम है. भगवान शिव की आदिशक्ति देवी मातंगी हैं. मां मातंगी का रंग श्याम है. वह अपने मस्तक […]

Read More

हिन्दू धर्म में मासिक दुर्गाष्टमी व्रत का बहुत अधिक महत्व है. मासिक दुर्गाष्टमी का पर्व सभी देवी भक्तों के लिए बहुत खास माना जाता है. यह पर्व हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बड़ी धूमधाम और भक्ति के साथ मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो लोग इस पावन अवसर पर मां आदिशक्ति की आराधना करते हैं, उन्हें नवरात्र के बराबर फल की प्राप्ति होती है. इस बार मासिक दुर्गाष्टमी (Masik Durga Ashtami) 14 जुलाई को मनाई जाएगी. इस दिन बनने वाले शुभ योग में पूजा करने से उसका दोगुना फल प्राप्त होगा. इसके साथ ही घर […]

Read More

हिंदू धर्म का सबसे पवित्र महीना इस साल 22 जुलाई से शुरू होने वाला है जो 19 अगस्त तक चलेगा. सावन माह के शुरू होते ही कावड़ यात्रा की भी शुरुआत हो जाती है. इस दौरान लाखों कांवड़िए हरिद्वार, गोमुख, गंगोत्री, काशी विश्वनाथ, बैद्यनाथ आदि पवित्र जगहों से जल लेने के लिए निकलते हैं. फिर इस जल को कांवड़ में भरकर लाते है और अपने आसपास के शिवालय के शिवलिंग पर चढ़ाते हैं. सावन में किसी भी दिन शिव का जलाभिषेक किया जा सकता है लेकिन कावड़िए विशेष रूप से शिवरात्रि के दिन जलाभिषेक करते हैं. सावन महीने में शिवलिंग […]

Read More

साल 2024 में सावन का महीना 22 जुलाई से शुरू होने वाला है. यह महीने भगवान शिव को सबसे प्रिय माना जाता है. भगवान शिव को समर्पित इस माह में शिव भक्त व्रत रखते हैं और शिव पूजा करते हैं. इस साल सावन का महीना सोमवार के दिन से शुरू होगा, इसलिए सावन माह का महत्व और भी बढ़ जाएगा. ऐसे में आपको सावन शुरू होने से पहले घर में क्या बदलाव करने चाहिए, इस बारे में पता होना जरूरी है. ये बदलाव आपके जीवन में सकारात्मकता ला सकते हैं. वहीं, अगर आप ये बदलाव नहीं करते, तो शिव कृपा […]

Read More

Kark Sankranti 2024: सावन माह की संक्रांति को कर्क संक्रांति कहा जाता है. यह पर्व धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन सूर्य मिथुन राशि से निकल कर कर्क राशि में प्रवेश करते हैं. इस साल कर्क संक्रांति 16 जुलाई यानी मंगलवार के दिन है. हिन्दू धर्म में सूर्य की पूजा के लिए संक्रांति का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है. कर्क संक्रांति को सूर्य उत्तरायण काल से दक्षिणायन काल में आते हैं, और मकर संक्रांति तक इसी काल में रहते है. मान्यता के अनुसार, कर्क संक्रांति के दिन सूर्यदेव की पूजा अर्चना करने से जीवन […]

Read More

हिन्दू धर्म में भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना 22 जुलाई दिन सोमवार से शुरू होने जा रहा है. सोमवार को भगवान शिव के निमित्त व्रत रख उनका पूजन किया जाएगा. तो वहीं सावन माह के पहले मंगलवार का भी विशेष महत्व है. यह दिन मां पार्वती को समर्पित है. महिलाएं इस दिन मंगला गौरी का व्रत रखती है.इस बार सावन के पहले दिन भोलेनाथ और दूसरे गौरी माता की पूजा विधि विधान से की जाएगी. मंगला गौरी व्रत की शुरुआत सावन शुरू होने के अगले दिन यानी 23 जुलाई से होगी. इस दिन पहला मंगला गौरी व्रत रखा […]

Read More